-आवंटन में सीवीसी के नियमों की खुलेआम उड़ाई गईं धज्जियां
-५० करोड़ रुपए टर्नओवर की सीलिंग कर डाली २१० करोड़ रुपए
सामना संवाददाता / मुंबई
ठेकेदारी घोटालों के नए खुलासों के बीच मीठी नदी निविदा कांड एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि मुंबई मनपा ने सीवीसी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए ठेका फिक्सिंग का खुला खेल खेला है। इस साजिश के तहत पात्र कंपनी के टर्नओवर की सीलिंग ५० करोड़ रुपए से बढ़ाकर २१० करोड़ रुपए कर दी गई। ऐसा करके एक भाजपाई उद्योगपति को लाभान्वित किया गया। इस पूरे प्रकरण पर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार प्रहार किया है।
मुंबई मनपा द्वारा मीठी नदी की सफाई के लिए निकाली गई निविदा प्रक्रिया पर उठे आरोपों पर मनपा की ओर से मीडिया को दिया गया स्पष्टीकरण ही इस बात की पुष्टि करता है कि इस निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। इस निविदा में केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। इस तरह का आरोप महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने किया है। उन्होंने कहा कि नदी की सफाई के लिए निकाली गई निविदा में पहले पंप उत्पादक कंपनी के टर्नओवर की सीलिंग ५० करोड़ से बढ़ाकर २१० करोड़ रुपए कर दी गई, जबकि पंप उत्पादक कंपनी का इस ठेकेदार कंपनी से केवल पंप सप्लाई करने का ही संबंध है। इस मामले में सावंत ने प्रमाणों के साथ मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की थी।
मनपा की सफाई
मनपा अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से कहा कि निविदा में पंप सप्लाई का हिस्सा ७०० करोड़ रुपए का है। इसलिए पंप की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हमें लगा कि उत्पादक कंपनी का टर्नओवर कम से कम ३० फीसदी यानी २१० करोड़ रुपए होना चाहिए। यह बदलाव हमने अच्छे इरादे से किया।
तीसरी बार निकाली जा रही निविदा
यह निविदा तीसरी बार निकाली जा रही है। पहली बार मार्च २०२३ और दूसरी बार १४ फरवरी २०२५ को निविदा निकाली गई थी, लेकिन दोनों बार रद्द कर दी गई। अब सितंबर २०२५ में फिर से यह निविदा लाई गई है।
