सामना संवाददाता / मुंबई
सरकारी जमीन पर बने मुंबई के १६ जिमखाना के प्रशासकों के साथ हाल की बैठकों में महाराष्ट्र सरकार ने क्लबों के कामकाज में अपनी भूमिका काफी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने लीज नवीनीकरण की शर्त के तौर पर कहा है कि प्रबंधन समिति में जिला अधिकारी को सीट देनी होगी, कलेक्टर की सिफारिशें क्लबों पर बाध्यकारी होंगी और सार्वजनिक कार्यक्रमों व आपात स्थिति में जिमखाना का इस्तेमाल करने देना होगा। कलेक्टर कार्यालय और जिमखाना प्रशासकों के बीच हाल की बातचीत में ये प्रस्ताव प्रमुखता से उठे हैं।
सरकार ने संकेत दिया है कि सार्वजनिक जमीन पर बने क्लबों के भविष्य के लीज नवीनीकरण के लिए ये शर्तें आधार बनेंगी। फिलहाल मुंबई के १६ जिमखाना कलेक्टर की जमीन पर बने हैं, जिन्हें १९वीं और २०वीं सदी की शुरुआत में तत्कालीन औपनिवेशिक प्रशासन ने लीज पर दिया था। बॉम्बे जिमखाना, इस्लाम जिमखाना, पारसी जिमखाना और हिंदू जिमखाना समेत कई प्रमुख संस्थानों की लीज पहले ही खत्म हो चुकी है और नवीनीकरण लंबित है। बाकी की लीज आने वाले सालों में खत्म होगी। सरकार की प्रमुख शर्तों में जिलाधिकारी को हर जिमखाना के प्रबंधन बोर्ड में पदेन सदस्य के रूप में शामिल करना है। प्रस्तावित ढांचे में यह भी कहा गया है कि जिला कलेक्टर की सिफारिशें जिमखाना और क्लबों पर बाध्यकारी होंगी। कलेक्टर को हर साल कम से कम पांच लोगों को स्थायी सदस्यता देने या सर्विस सदस्यता को स्थायी सदस्यता में बदलने की सिफारिश करने का अधिकार भी मिलेगा।
६६४ एकड़ में फैले हैं जिमखाना
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिमखाना और एलीट क्लब ६६४ एकड़ जमीन पर काबिज हैं, जो मुंबई के कुल ३,७८० एकड़ खुले क्षेत्र का लगभग पांचवां हिस्सा है। एक और बड़ा बदलाव इवेंट और राजस्व से जुड़ा है। प्रस्तावित ढांचे के तहत, जिमखाना साल में अधिकतम ४५ दिन खेल आयोजन कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए जिला कलेक्टर को पहले सूचना देनी होगी। इवेंट आयोजित करने के लिए उन्हें ५०,००० रुपये से १.५ लाख रुपये प्रति दिन तक लाइसेंस फीस भी देनी होगी।
