-२ साल से गुहार लगा रहे हैं फ्लैटधारक
-मीरा-भायंदर मनपा की भूमिका संदिग्ध
सामना संवाददाता / भायंदर
मीरारोड के नयानगर स्थित ओस्तवाल पैराडाइज हाउसिंग सोसायटी घोटाले में मीरा-भायंदर महानगरपालिका की भूमिका भी संदिग्ध है। इस प्रकरण में बिल्डर ने नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से इमारतों का निर्माण किया और फिर उन फ्लैट्स को लोगों को बेच दिया।
शुरुआत के समय २००५ एवं २००६ में ओस्तवाल बिल्डर्स को मीरा-भायंदर महानगरपालिका से २ अलग-अलग सुधारित बांधकाम अनुमति मिली थी। इसके आधार पर इमारत नंबर ३, ४, ५, ६, ७ और एक शॉपिंग सेंटर का निर्माण किया गया। इमारत नंबर ६ जिसे चार मंजिला की मंजूरी मिली थी, वह बाद में सात मंजिल की बना दी गई। यही नहीं निर्माण के दौरान कई नक्शों में हेरफेर कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे फ्लैट्स बेचे गए।
जब सोसायटी ने आरटीआई के जरिए ये दस्तावेज निकाले तो सामने आया कि जिन नक्शों को असली बताकर सोसायटी रजिस्ट्रेशन और निर्माण की मंजूरी ली गई थी वे बनावटी थे। बिल्डर ने साल २०१९ में सोसायटी के पदाधिकारियों के साथ एक एमओयू किया था, जिसमें यह कहा गया था कि वह २ वर्ष में सारे अनियमित निर्माण को वैध करवाएगा, कन्वेयन्स डीड करवाएगा और किसी प्रकार का अतिरिक्त एफएसआई पुरानी इमारतों से नए निर्माण में नहीं जोड़ेगा, पर यह समझौता सिर्फ एक दिखावा साबित हुआ। न ही किसी वादे को पूरा किया गया, बल्कि पुराने फ्लैट मालिकों की मंजूरी के बिना ही अब बहुमंजिली नई इमारत ओस्तवाल बिल्डिंग नंबर ९ का निर्माण भी चालू हो गया है, जिसमें उन्हीं इमारतों का एफएसआई जोड़ा गया है। लोग अब इसके विरोध में खड़े हैं और यह सब बिना उनकी मंजूरी के हुआ है।
प्रशासन ने भी मूंद ली आंखें
इससे स्पष्ट है कि प्रशासन ने भी आंखें मूंद ली थीं या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। इतना ही नहीं, फायर विभाग से मिली एनओसी की भी वैधता समाप्त पाई गई। जिस अस्थायी फायर एनओसी के आधार पर निर्माण मंजूरी सीसी जारी की गई, वह २०२० की थी और तब यूडीसीपीआर लागू ही नहीं हुआ था। फिर भी बिल्डर को नियमों के खिलाफ जाकर निर्माण की मंजूरी दे दी गई।
करोड़ों की ठगी
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, इसमें अनुमान लगाया गया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए बिल्डर ने करोड़ों से अधिक की ठगी की है। पुलिस का कहना है कि वह जांच कर रहे हैं और मनपा के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर दस्तावेज की मांग की है।
चौंकाने वाली बात
-मनपा के टाउन प्लानिंग विभाग को बार-बार शिकायत और नोटिस देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। -२२ अप्रैल २०२४ को विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश में बिल्डर को ९० दिनों के भीतर बेसमेंट का व्यावसायिक उपयोग बंद करने और भूमापन पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
-नियमों के अनुसार, विकास कार्य शुरू करने से पहले भूमापन या साइट प्लान अनिवार्य है, लेकिन बिना इन प्रक्रियाओं के ही विकास अनुमति कमिसमेंट सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।
-इसके बावजूद विभाग पूरी तरह निष्क्रिय रहा। तीन बार और नोटिस दिए गए, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद भी बिल्डर के चल रहे निर्माण को रोका नहीं गया।
-इसके अलावा सोसायटी नें यूडीसीपीआर के कई अन्य नियमों के उल्लंघन को मनपा के संज्ञान में लाया गया तो विभाग ने बिल्डर और उनके कंसल्टेंट को पत्र जरूर भेजे, लेकिन कोई जवाब न आने पर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।
पुलिस विभाग द्वारा क्या दस्तावेज मांगे गए हैं वह तो देखना होगा, जो भी दस्तावेज उन्हें चाहिए होंगे हम उपलब्ध कराएंगे। अभी नई इमारत के चल रहे निर्माण के लिए कोई भी स्टॉप वर्क का नोटिस हमारे विभाग द्वारा भेजा नहीं गया है। हम सभी माप-जोख करेंगे। उसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा। जो भी होगा नियमानुसार होगा।
-पुरुषोत्तम शिंदे, सहायक संचालक, नगर रचना विभाग मीरा-भायंदर मनपा
वर्तमान में फडणवीस और शिंदे सरकार व एमबीएमसी ने ओस्तवाल डेवलपर को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे संविधान में अनुच्छेद १४ के तहत हमें दिए गए हमारे मौलिक अधिकारों का हनन किया है। ऐसा लगता है कि शक्तिशाली और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों के लिए कानून अलग है और आम नागरिक के लिए अलग।
-रंजीत झा, सचिव, ओस्तवाल पैराडाइज
