एजेंसी / वॉशिंगटन
दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना का प्रतीक माना जाने वाला अमेरिकी परमाणु एयरक्राफ्ट वैâरियर युएसएस अब्राहम लिंकन अब दुश्मन की मिसाइलों से ज्यादा अपने ही जवानों की थकान, तनाव और टूटते मनोबल से जूझता दिखाई दे रहा है। जहाज पर तैनात करीब ५,००० सेलर्स डीज मरीन में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ नौसैनिकों ने समुद्र में कूदने की कोशिश तक की है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर २०२५ से तैनाती पर है और अब उसके जवानों को समुद्र में २६० दिन से ज्यादा हो चुके हैं। जहाज को मूल रूप से प्रशांत क्षेत्र में तैनात किया गया था, लेकिन जनवरी में इसे पश्चिम एशिया की ओर मोड़ दिया गया। इसके बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में इसकी भूमिका बढ़ती चली गई और इसकी घर वापसी लगातार टलती रही।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सैनिक परिवारों ने अमेरिकी नौसेना नेतृत्व के सामने खुले तौर पर मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के खतरे का मुद्दा उठाया है। अमेरिकी नौसेना ने यह नहीं बताया है कि मौजूदा तैनाती के दौरान वास्तव में कितने जवानों ने खुद को नुकसान पहुंचाने या जहाज से कूदने की कोशिश की।
युद्ध मशीन भी बेबस
अब सवाल अमेरिका की सैन्य ताकत से ज्यादा उस ताकत को चलाने वाले इंसानों का है। अरबों डॉलर का परमाणु एयरक्राफ्ट वैâरियर, अत्याधुनिक फाइटर जेट और मिसाइलें किसी नौसेना को ताकतवर तो बना सकती हैं, लेकिन अगर उन्हें चलाने वाले जवान ही मानसिक रूप से टूटने लगें तो सुपरपावर की सबसे महंगी युद्ध मशीन भी बेबस नजर आने लगती है।
बुनियादी चीजों तक की किल्लत से जूझ रहे जवान
समस्या सिर्फ लंबे युद्ध की नहीं है। परिवारों और अमेरिकी सांसदों की शिकायतों में फपंâूद लगे शॉवर, खराब टॉयलेट, हफ्तों तक बंद लॉन्ड्री, गर्म पानी की कमी, खाने और साबुन-टूथपेस्ट जैसी बुनियादी चीजों की किल्लत तक का जिक्र है। कुछ जवानों को २५० से अधिक दिनों की अवधि में जमीन पर उतरने के बेहद सीमित अवसर मिले।
