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चेहरा दिखाने आ गए अमित शाह!

-पूरे मानसून सत्र में जवाब मांगता रहा विपक्ष
-आखिरी दिन आए गृह मंत्री
-‘वंदे मातरम’ हुआ और सदन खत्म
-१९ दिन में १९ घंटे भी नहीं चली लोकसभा
-छात्रों पर बल प्रयोग और ‘पैलेट गन’ के आरोपों पर नहीं हो सकी निर्णायक बहस

-इस मानसून सत्र में लोकसभा की कार्यवाही महज करीब १९ घंटे ही चल सकी। लेकिन सवाल यह है कि जिस जवाब के इंतजार में विपक्ष लगभग पूरे सत्र में सरकार को घेरता रहा, वह जवाब आखिर आया कहां?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
जिस गृह मंत्री अमित शाह को लेकर मानसून सत्र में विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा, जिनकी सदन में मौजूदगी और जवाब की मांग को लेकर बार-बार हंगामा हुआ, वे आखिरकार सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में दिखाई दिए। लेकिन तब तक सवालों के जवाब का समय लगभग खत्म हो चुका था। अमित शाह आए, ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गान के लिए खड़े हुए और कुछ ही देर बाद लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सदन में मौजूद थे।
सुबह ११ बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही शुरू होते ही ‘वंदे मातरम’ के गान की घोषणा की। पूर्ण राष्ट्रगीत के गान के बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। हंगामे और लगातार गतिरोध से प्रभावित इस मानसून सत्र में लोकसभा की कार्यवाही महज करीब १९ घंटे ही चल सकी। लेकिन सवाल यह है कि जिस जवाब के इंतजार में विपक्ष लगभग पूरे सत्र में सरकार को घेरता रहा, वह जवाब आखिर आया कहां? सत्र का सबसे विस्फोटक मुद्दा नीट और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई रहा। राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट चलाने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। सत्ता पक्ष ने इस आरोप को खारिज करते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की, जिसके बाद सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। राजनीतिक तौर पर सत्र का आखिरी दृश्य विपक्ष को एक तीखा तंज देने का मौका जरूर दे गया। जिस अमित शाह को जवाब देने के लिए सदन में बुलाया जा रहा था, वे आखिरी दिन आए जरूर, लेकिन तब जब जवाब-सवाल की गुंजाइश ही लगभग समाप्त हो चुकी थी। यानी पूरे सत्र का निचोड़ विपक्ष अपने अंदाज में कुछ यूं निकाल सकता है-
‘जवाब देने नहीं आए, आखिरी दिन चेहरा दिखाने आए!’
`शर्मनाक, सरकार ने १९ दिन बर्बाद कर दिए’
सदन की कार्यवाही १९ दिन चली और गृह मंत्री अमित शाह के पास कम से कम २५-२६ दिन थे, फिर भी उन्होंने इस बारे में नहीं सोचा। अमित शाह का बयान सिर्फ जनता में अपनी छवि बनाने के लिए है कि मैं जवाब देने को तैयार हूं। वे कब तैयार हुए, जब उनका एजेंडा पूरा हो गया। सरकार ने १९ दिन बर्बाद कर दिए और अब वे सदन का समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं? ये शर्म की बात है।
विपक्ष का आरोप, सवालों से भागी सरकार
विपक्ष लगातार मांग करता रहा कि अमित शाह सदन में आएं और साफ-साफ बताएं कि छात्रों पर बल प्रयोग तथा कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। यहां तक कि राज्यसभा में भी शाह की मौजूदगी की मांग उठी। विपक्ष का कहना था कि सरकार सवालों से भाग रही है। उसे भाषण नहीं बल्कि सीधे सवालों के जवाब चाहिए। नतीजा यह हुआ कि सवाल अपनी जगह खड़े रहे और संसद का मानसून सत्र खत्म हो गया।

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