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५०० करोड़ के कर्ज पर भाजपा-शिंदे गुट आमने-सामने!

-सीसी सड़कों के नाम पर कर्ज की राजनीति गरमाई
-नगर विकास विभाग ने मांगा पाई-पाई का हिसाब

सुरेश गोलानी / मुंबई
सीमेंट-कंक्रीटीकरण (सीसी) सड़क परियोजना हेतु मीरा-भायंदर महानगरपालिका द्वारा प्रस्तावित ५०० करोड़ कर्ज लेने के मुद्दे को लेकर शिंदे गुट और भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रहे राजनैतिक घमासान में एक नया मोड आया है। मनपा द्वारा एक नामांकित राष्ट्रीयकृत बैंक से ५०० करोड़ कर्ज लेने हेतु अंतिम मंजूरी मिलने का प्रस्ताव रखा था जिसके जवाब में नगर विकास विभाग ने सड़क कार्यों का विस्तृत हिसाब-किताब, राशि के सटीक उपयोग की जानकारी, पुराने कार्यों की भौतिक प्रगति, प्रशासनिक शासन के दौरान स्वीकृत कार्यों का खर्च और लंबित भुगतानों का खुलासा और पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
ज्ञात हो कि नगर विकास विभाग शिंदे गुट के पास है और भाजपा शासित मनपा के इस प्रस्ताव को सवालों के घेरे में डालकर एक प्रकार से लाल झंडा दिखा दिया है। नगर विभाग द्वारा आदेशित वित्तीय जांच के कारण मुंह के बल गिरी भाजपा को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने शिंदे गुट के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि शहर की आंतरिक सड़कों के सीमेंट-कंक्रीटीकरण के लिए मनपा को धन की आवश्यकता थी और लगातार प्रयास करने के बाद १७ नवंबर २०२२ को इस परियोजना को मंजूरी मिली थी। इसके तहत एक राष्ट्रीयकृत बैंक ने ५०० करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत किया, लेकिन मनपा द्वारा कई बार अनुरोध करने के बावजूद सरनाईक के दबाव के कारण नगर विकास विभाग प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देने में टालमटोल कर रहा है। मेहता ने मांग की कि प्रस्ताव को तुरंत अंतिम मंजूरी दी जाए, अन्यथा सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए १० अगस्त को भाजपा की ओर से ‘रास्ता रोको’ आंदोलन किया जाएगा। हालांकि भाजपा ने अपना आंदोलन ये कहकर स्थगित कर दिया था कि सरकार उनकी मांग को जल्द पूरा करेगी। इसके जवाब में शिंदे गुट ने तीखा प्रहार करते हुए यह दावा किया था कि ५०० करोड़ का लोन तो सिर्फ एक बहाना है, दरअसल भाजपा की नजर शहर के विकास पर नहीं बल्कि ठेकेदारों से मिलने वाले २३ प्रतिशत कमीशन पर है जिसके कारण मनपा की संपत्तियों को ३० वर्षों के लिए गिरवी रखने की साजिश रची जा रही है। ज्ञात हो कि आर्थिक तंगी से जूझ रही मनपा पहले से ही २१० करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हुई है।
भ्रष्टाचार और घटिया काम की भेंट चढ़ी सीसी सड़क योजना
शहर को गड्ढामुक्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई सीसी सड़क परियोजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। मानकों के अनुसार, कंक्रीट सड़क निर्माण में मजबूत सबग्रेड, मिट्टी की उचित कॉम्पैक्शन, स्टील सुदृढीकरण, फॉर्मवर्क, उपचार और फिनिशिंग जैसे कई तकनीकी चरणों का पालन जरूरी है। आरोप है कि कई निर्माणाधीन साइटों पर खर्च बचाने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है और निर्धारित तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है। इससे सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन आरोपों ने सरकार की गड्ढामुक्त सड़क योजना की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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