कविता श्रीवास्तव
ढाबे के खाने का अपना ही मजा है। कभी ये ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों के लिए आराम और भोजन का ठिकाना हुआ करते थे। रात का खाना, चाय की चुस्की और फिर वहीं पड़ी चारपाई पर कुछ घंटों की नींद। हाईवे की जिंदगी का यह पुराना ठिकाना रहा है। लेकिन अब ढाबों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब ढाबे सिर्फ ट्रकवालों के ठिकाने नहीं रहे। परिवारों के लिए आउटिंग, दोस्तों के लिए वीकेंड ड्राइव और कार से लंबी यात्रा करनेवालों के लिए फूड स्टॉप बन चुके हैं। मुंबई से पुणे, नासिक, अमदाबाद या दूसरे शहरों की ओर निकलते ही लोग पहले से तय कर लेते हैं कि रास्ते में कहां रुकना है। कहीं महाराष्ट्रियन थाली पसंद आती है तो कहीं काठियावाडी। कहीं पंजाबी तड़का तो कहीं कोकणी स्वाद और कहीं बाटी-चोखा भी। यानी हाईवे के ढाबे अब सफर का एक डेस्टिनेशन बन चुके हैं, लेकिन अब इन ढाबों पर प्रशासन की नजर है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या अन्य व्यावसायिक निर्माण और संचालन पर कार्रवाई का आदेश दिया है। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे मौजूद नए और अनधिकृत ढांचों की जांच की जाए और नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हाईवे के किनारे मौजूद हर ढाबा अवैध या बंद होनेवाला है। प्रशासन प्रत्येक प्रतिष्ठान की वास्तविक लोकेशन, जमीन की स्थिति, निर्माण की अनुमति, जरूरी लाइसेंस और हाईवे सुरक्षा मानकों की जांच करेगा। मुंबई-नासिक, मुंबई-अमदाबाद और पुराने मुंबई-पुणे मार्ग सहित महाराष्ट्र के कई प्रमुख हाईवे पर बड़ी संख्या में ढाबे, भोजनालय और ट्रक स्टॉप हैं। इनमें छोटे पारंपरिक ढाबों से लेकर बड़े पारिवारिक रेस्टोरेंट तक शामिल हैं। ऐसे में कार्रवाई का असर हाईवे यात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जो ढाबे हाईवे से प्रतिबंधित दूरी के नियमों की अनदेखी करते हैं, उनकी समीक्षा होगी। जिला प्रशासन और पुलिस को संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिला स्तरीय हाईवे सुरक्षा कार्यदल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है ढाबों के सामने वाहनों की लापरवाह पार्विंâग। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना में हुई गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिया था। फलोदी हादसे में सड़क किनारे ढाबे के पास खड़े ट्रेलर से बस टकराने के बाद कई लोगों की जान गई थी। इसके बाद हाईवे के आसपास अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण और सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्विंâग को लेकर गंभीर सवाल उठे। अब महाराष्ट्र में हाईवे को सुरक्षित बनाने की मुहिम शुरू हुई है। यानी अगली बार हाईवे पर रुककर ढाबे के गरमा-गरम थाली का स्वाद और स्वादिष्ट व्यंजन का मजा लेने से पहले यह भी सुनिश्चित कीजिए कि ढाबा कितना वैध और सुरक्षित है।
