मुख्यपृष्ठनए समाचारबिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के गले की हड्डी बना यूपी सरकार...

बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के गले की हड्डी बना यूपी सरकार में शामिल “दल”

2022 में योगी के खिलाफ लड़ा, फिर अमित शाह से मिल कर योगी मंत्रिमंडल में घुसा!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने घोषणा की कि वह बिहार चुनाव लड़ेगी और “बीजेपी व उसके सहयोगियों को नुकसान पहुंचाएगी।” 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़े राजभर ने अमित शाह से सीधे संपर्क कर यूपी की सत्ता में घुस गये। सत्ता का हिस्सा होते हुए भी राजभर का यह एलान एनडीए के भीतर हलचल मचा गया। सुभासपा महासचिव अरुण राजभर ने कहा, “हम सभी शीर्ष बीजेपी नेताओं से मिले थे, उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि सीटें मिलेंगी। लेकिन अब अगर किसी को जीत का अहंकार है, तो हम दिखाएंगे कि जनता कैसे फैसला करती है। हम ईबीसी (अति पिछड़ा वर्ग) और दलित वोटों को एकजुट करेंगे और बीजेपी-जदयू को नुकसान पहुंचाएंगे।” योगी आदित्यनाथ की सरकार में केंद्र की पहल पर थोपे गये राजभर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के गले की हड्डी बन गये हैं। राजभर की पार्टी ने बिहार में पिछले एक साल में 50 से ज्यादा रैलियां की हैं। बक्सर, सासाराम, सीवान, गया और औरंगाबाद जैसे जिलों में सुभासपा लगातार अपने संगठन को मजबूत कर रही है। पार्टी का दावा है कि राजभर, रजवार, राजवंशी और राजघोष जैसे कुछ ओबीसी समूहों में उसका असर है और ये समूह बिहार की आबादी का लगभग 4.2 फीसदी हैं।

बिहार भाजपा के रणनीतिकारों के अनुसार सुभासपा की सीट जीतने की संभावना भले सीमित हो, लेकिन उसके वोट काटने की क्षमता असली खतरा है। वर्ष 2020 के चुनाव में भी असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और बीएसपी के साथ मिलकर उसने तीन-चार सीटों पर बीजेपी-जदयू उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया था।” राजभर इस बार खुद को “ओबीसी और महादलितों के मुद्दों के असली प्रतिनिधि” के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी का “ओबीसी एजेंडा” केवल कागज पर है, ज़मीनी स्तर पर वह उन्हीं कुछ जातियों तक सीमित है जो पहले से सत्ता के करीब हैं।बता दें कि पिछले दो महीनों के दौरान ओम प्रकाश राजभर बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से भी मिले। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सुभासपा ने बिहार में पहले 29 सीटों की मांग की थी, बाद में इसे घटाकर पांच कर दिया।उसके बाद भी बीजेपी की ओर से स्पष्ट सहमति नहीं मिली। बिहार भाजपा के नेताओं का कहना है कि राजभर हर राज्य में अपनी राजनीतिक जगह तलाश रहे हैं। बिहार में बीजीपी पहले से ही जदयू और लोजपा के साथ गठबंधन तालमेल में है। ऐसे में उन्हें सीटें देना संभव नहीं था। यह वही क्षण था जब राजभर ने दिल्ली से लौटते ही बयान दिया अब बीजेपी और उसके सहयोगियों को दिखा देंगे कि बिना सुभासपा के क्या होता है।

अन्य समाचार