अनिल मिश्र / पटना
बिहार राज्य संबद्ध डिग्री कॉलेज शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के मगध विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मिट्ठू, संरक्षक प्रो. नवल किशोर शर्मा, डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, डॉ. अरविंद कुमार, प्रो शशि भूषण प्रसाद, आदि ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा राज्य के उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव की तैयारी की सुगबुगाहट मिलते ही संपूर्ण राज्य के विश्वविद्यालय शिक्षको में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है, क्योंकि बिहार सरकार का यह प्रस्ताव बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 की मुल भावना का सीधा उलंघन करता है, साथ ही केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनइपी ) की स्वायत्तता, बहुविषयक शिक्षा आदि का पूरी तरह उलंघन है। स्नातक और स्नातकोत्तर हमेशा से विश्वविद्यालय के ही अभिन्न अंग रहे हैं, परंतु इस नए नियम लाने से स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षकों के बीच का आवश्यक समन्वय पूरी तरह टूट जाएगा। इस अधिनियम को लाने से राजभवन एवं राज्य सरकार के बीच भी द्वंद और तनाव सूबे के उच्च शिक्षा के सेहत के लिए ख़राब होगा। इस अधिनियम की बातें सामने आने पर राज्य के सभी विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज कॉलेजो के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों में भारी नाराजगी है तथा इस व्यवस्था को किसी हाल में बिहार में लाना राज्य के उच्च शिक्षा के लिए बेहतर नहीं होगा।
