-महंगाई से पहले ही टूटी कमर, अब भुखमरी की बारी
-हजारों राशन दुकानों पर लगा ताला
-गरीबों के पेट पर सरकार की मार
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई में राशन व्यवस्था का दम घुट रहा है। महंगाई में गरीब परिवार दो वक्त की रोटी के लिए सरकारी राशन पर निर्भर हैं, ऐसे में बड़ी संख्या में राशन की दुकानें ही बंद होती जा रही हैं ऐसे में गरीबों के खाने के लाले पड़ते नजर आ रहा है।
बता दें कि मुबई में पिछले पांच वर्षों में करीब एक हजार राशन दुकानें बंद हो चुकी हैं। घटता अनाज, बढ़ता किराया, बिजली, कर्मचारियों, परिवहन और माल उतारने का खर्च दुकानदारों पर भारी पड़ रहा है। यह सिर्फ राशन दुकानदारों का संकट नहीं है। यह उन गरीब परिवारों का सवाल है जिनकी रसोई का चूल्हा सरकारी राशन के सहारे जलता है। महाराष्ट्र के सरकारी पोर्टल पर २.५९ करोड़ राशन कार्डों से जुड़े १०.०२ करोड़ लाभार्थी दर्ज हैं। ऐसे में वितरण व्यवस्था कमजोर होना करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन गया है।
महंगाई बढ़ी, खर्च बढ़ा, गरीब की थाली वैâसे भरेगी?
आटा, चावल, दाल, सब्जी, तेल और गैस हर तरफ बढ़ते घरेलू खर्च के बीच गरीब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल भोजन का है। सरकार मुफ्त और सस्ते दामों में अनाज देने की योजना का प्रचार करती है, लेकिन अनाज बांटने वाली दुकानें ही बंद होती जा रही हैं। केंद्र के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति पांच किलो और अंत्योदय परिवारों को प्रति परिवार ३५ किलो खाद्यान्न मुफ्त दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि कागज पर अधिकार और जमीन पर उपलब्धता के बीच की दूरी साफ नजर आ रही है। मुंबई में पुनर्विकास और पलायन के कारण गरीब परिवारों के पते बदल रहे हैं। ऐसे में राशन कार्ड, दुकान और अनाज वितरण की व्यवस्था भी आसान होनी चाहिए। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, कई लाभार्थियों को दुकान बदलने और राशन हासिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हजार दुकानें बंद होना सरकार के लिए चेतावनी है। गरीब को मुफ्त अनाज देने की घोषणा करना आसान है, लेकिन उस अनाज को सम्मान के साथ गरीब की रसोई तक पहुंचाना सरकार की असली परीक्षा है। राशन दुकान चलाने वाले व्यापारियों का करना है कि सरकार को बंद हुई दुकानों की समीक्षा, दुकानदारों का कमीशन और परिवहन खर्च बढ़ाने, गरीबों के लिए नई दुकानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा महंगाई के हिसाब से पात्रता की समीक्षा करने की जरूरत है।
