शिवसेना का तीव्र विरोध, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्रीय रेल मंत्रालय द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया है। गुजरात के केवडिया रेलवे स्टेशन पर सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा लगाने की अनुमति देनेवाले मंत्रालय ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन पर शिवराय की प्रतिमा स्थापित करने के मामले में कहा है कि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। रेल मंत्रालय के इस निर्णय से भारी रोष निर्माण हुआ है। शिवसेना ने रेलवे मंत्रालय की इस भूमिका का तीव्र विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन के मुख्य प्रवेशद्वार पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने की मांग शिवसेना पिछले कई वर्षों से कर रही है। इसी संदर्भ में १० फरवरी को शिवसेना नेता व सांसद अरविंद सावंत ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखा था। लगभग आठ महीने बाद रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह ने उस पत्र का उत्तर भेजा है, जिसकी जानकारी अरविंद सावंत ने मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री का यह उत्तर महाराष्ट्र, महाराष्ट्र धर्म का अपमान और राज्य के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है।
अरविंद सावंत ने मीडिया के सामने केवडिया रेलवे स्टेशन परिसर, भवन और स्टेशन के अंदर स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमाओं और भित्तिचित्रों के फोटो भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री का उत्तर अत्यंत गुस्सा पैदा करने वाला है। उन्होंने महाराष्ट्र के सभी मराठी लोगों से सवाल किया कि भाजपा की तरफदारी करने वालों से पूछता हूं, क्या आपको छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान मंजूर है? अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि सरदार पटेल के प्रति उनका पूरा सम्मान है, लेकिन यदि रेलवे स्टेशन पर पटेल की प्रतिमा लगाने की अनुमति मिल सकती है तो छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने की अनुमति क्यों नहीं? रेल मंत्रालय वैâसे कह सकता है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है? यह सरासर दोहरी नीति है। सावंत ने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रपुरुष हैं। वे केवल महाराष्ट्र के नहीं हैं। उनके अपमान का अर्थ देश और महाराष्ट्र दोनों का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र को पत्र नहीं भेजा
शिवसेना नेता व विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा में मांग की थी कि राज्य सरकार ने सीएसएमटी पर शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करे। उस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक इस संदर्भ में राज्य सरकार का कोई पत्र केंद्र को भेजा ही नहीं गया है। इस तरह का तीखा आरोप अरविंद सावंत ने लगाया।
