राजन पारकर / मुंबई
कहा जाता है कि देशों का भी चेहरा होता है। वह चेहरा झंडा होता है। अगर झंडा झूठा हो जाए, तो पहचानना मुश्किल। अरे वाह! तो फिर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश हिंदुस्थान अब तेल के ड्रम के साथ ‘मेकअप’ करके घूम रहा है। ऐसी खबर आई तो दुनियाभर में कौतुहल का चूल्हा जरा जोर से भड़क उठा। ट्रंप साहब ने रूस की तेल कंपनियों पर पाबंदी लगा दी। तब हिंदुस्थान ने फौरन क्या किया? पहचान छिपाई, नाम बदला, झंडा बदला। यानी आज की भाषा में ‘हिंदुस्थान ने रिश्ता छुपाया नहीं, बस दुनिया को बताया नहीं!’
ट्रंप कहते हैं, ‘तेल मत लो!’ हिंदुस्थान कहता है, ‘ठीक है, हम आपका कहना नहीं मानेंगे। हम आपसे नहीं, फेक फलैग से तेल लेंगे!’ पिछले नौ महीनों में ५४ लाख टन तेल, कीमत, २.१ अरब यूरो और इस लाजवाब खेल के लिए ३० जहाज सीधे भारत पहुंचे। दुनिया को दिखाने के लिए झंडा अलग और माल सही ठिकाने पर। यह है वैश्विक कूटनीति का ‘अत्रे-शैली’ नाटक। नायक हिंदुस्थान, खलनायक ट्रंप, और छोटा-सा दोस्त फर्जी झंडा! ट्रंप कहते हैं, ‘टैरिफ’, हिंदुस्थान कहता है, ‘टैलेंट’। ट्रंप साहब दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी ‘नो-डिस्काउंट’ दुकान समझते हैं। उन्होंने कहा, ‘टैरिफ लगाऊंगा’, हिंदुस्थान बोला, ‘लगाइए साहब। डर हमको भी नहीं लगता। झंडा बदल दें तो जीपीएस भी कन्फ्यूज हो जाता है।’
तेल का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
फर्जी झंडा, असली कारोबार!
रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी, ‘यह खतरनाक खेल है’
ट्रंप ने हिंदुस्थान पर टैरिफ लगाकर मोदी सरकार को जबरदस्त टेंशन दे दिया है। मगर ट्रंप का टैरिफ ऐसा, जैसे खांसी की दवा पर रोक लगा दी जाए और भारत खांसी रोकने के लिए झुनका-भाखर खा ले। फर्जी झंडा, असली कारोबार। इन फर्जी झंडे वाले जहाजों से तेल आयात करना वैसा ही है जैसे उपग्रहों से कहना, ‘थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करो!’
दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं, ‘यह खतरनाक खेल है, ‘भारत कहता है, ‘हां है, पर महंगाई से तो कम खतरनाक।’ देश को सस्ता तेल चाहिए और वह किसी भी झंडे से मिले तो क्या बुरा? जनता को कीमत दिखती है, झंडा दिखता नहीं। हिंदुस्थान का अब तक का सबसे ‘चतुर आयात’ वैश्विक एजेंसियां कहती हैं, ‘झूठे झंडे के तहत सबसे बड़ी आयात भारत ने की!’ वाह! दुनिया के बड़े देशों को गुप्त अभियान याद आता है तो ००७ या सीआईए। और हिंदुस्थान? ३० जहाज खुले में, सिर्फ झंडा बदलकर सीधे खरीदारी! इतना भी राज रखा होता तो यहां संसद में मच्छर भी भाषण देने आ जाते! ट्रंप का अमेरिका, रूस का तेल, भारत की बुद्धि और झंडा ‘कट-टू-फिट’ इस पूरे नाटक में सबसे मजेदार बात, दुनिया को सब पता है, फिर भी सब शांत हैं। जैसे घर में पत्नी को पति का मोबाइल पासवर्ड पता होता है, पर वह शांत रहती है फिर कभी सही समय देखकर कहती है, ‘मैं सब जानती हूं’!
आखिर में…
अमेरिका कहता है, ‘यह गलत है!’ रूस बोला, पैसा मिल गया। भारत कहता है, ‘गलत कहां? झंडा झूठा, तेल सच्चा, ज़रूरत असली।’ दुनिया कहती है, ‘यही है हिंदुस्थान! जहाज समुद्र में तैरते हैं और अक्ल जमीन पर! यह सरकार कुछ भी कर ले, उन्हें बाजार के भाव जितना ही ‘अंतर्राष्ट्रीय हालात’ का ज्ञान है बाकी, झूठे झंडे का इस्तेमाल क्या चुनाव में भी हो सकता है यह सोचना चाहिए!’
