अनिल मिश्र / बोधगया
बिहार प्रदेश के गया जिला मुख्यालय से पन्द्रह किलोमीटर की दूरी पर बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।इस बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर स्थित बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी जिसे लेकर यह विश्व भर में महात्मा बुद्ध के कारण ज्ञान भूमि के रूप में विख्यात है। पूरे दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबियों की यहां बड़ी आस्था जुड़ी हुई है।इसी कारण बोधगया को बौद्धों की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है।इस बीच विश्व शांति और बुद्ध उपदेशों के पाठ के लिए आयोजित दस दिवसीय इंटरनेशनल त्रिपिटक चैटिंग सेरेमनी आज से भव्य रूप में शुरू हो गये हैं।जो 2 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलने वाले इस 20वें अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैटिंग आयोजन का उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्वलित कर किया। यह पहला अवसर है जब भारत इस ऐतिहासिक चैटिंग समारोह की मेजबानी कर रहा है।इस दस दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 27 देशों से 20 हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु, भिक्षुणी और श्रद्धालु शामिल हुए हैं। इस बीच महाबोधि मंदिर परिसर में बोधिवृक्ष के नीचे यह पवित्र त्रिपिटक पाठ शुरू हुआ, जिसमें पहले ही दिन हजारों की संख्या में बौद्ध अनुयायी शामिल हुए।इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, थाईलैंड के संघ राजा, महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति की सचिव डॉ. श्वेता महारथी सहित कई अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महाविहारों के वरिष्ठ भिक्षु उपस्थित रहे। इस उद्घाटन समारोह से पहले केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में जाकर भगवान बुद्ध के दर्शन एवं पूजा-अर्चना किए। आज सुबह बोधगया की 80 फुट बुद्ध प्रतिमा परिसर से धम्म पदयात्रा निकाली गई, जो जापानी मॉनेस्ट्री, थाई मॉनेस्ट्री और जयप्रकाश उद्यान होते हुए महाबोधि मंदिर पहुँची। इस दौरान पंचशील ध्वज, गाजे-बाजे और पारंपरिक रथ के साथ हजारों भिक्षु “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि” का उद्घोष कर रहे ।इस भव्य आयोजन का स्वागत ओमेश अमेरिका ने किया, वहीं मुख्य अतिथि शेखावत ने प्रधानमंत्री के संदेश भी पढ़कर सुनाए। पहली बार भारत द्वारा आयोजित यह त्रिपिटक चैटिंग सेरेमनी बोधगया में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्थली भगवान बुद्ध की ज्ञान भूमि बोधगया में आज मंगलवार से त्रिपिटक पूजा शुरू हो गई है। यह पूजा 2 दिसंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक चलेगा।10 दिवसीय इस विश्व प्रसिद्ध त्रिपिटक पूजा में 27 देश के 20 हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणी शामिल होंगे।
इस बार खास बात यह है, कि इसकी मेजबानी खुद भारत कर रहा है।बोधगया में आयोजित 20वें त्रिपिटक पूजा में भगवान बुद्ध के दिए उपदेशों के सूत गुंजायमान होंगे. ‘बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मं शरणम गच्छामि’ के साथ भगवान बुद्ध के दिए त्रिपिटक सूत की गूंज विश्व भर में समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए होगी।इस संबंध में बताया जाता है कि भगवान महात्मा बुद्ध को बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई तो उसके बाद वे सारनाथ चले गए।वर्षावास में वाणी का संग्रह किया।पांच शिष्यों के बीच वहीं त्रिपिटक हुआ।उसके बाद से त्रिपिटक पूजा की प्राचीन परंपरा है शुरू हुई जो आज 2600 साल से चल रही है।इस संबंध में भिक्षु रत्न थिरु बताते हैं कि त्रिपिटक चैटिंग पूजा में बारी-बारी से चैटिंग होती है।इस बार विनय पिटक की चैटिंग होगी, जो 10 दिनों तक होगी। पहली बार भारत द्वारा इसका आयोजन किया गया है। इससे पूर्व दूसरे देशों के द्वारा इसका आयोजन किया जाता था। बौद्ध नियम के अनुसार भारत दो साल तक इसका आयोजन लगातार करेगा।
