समय बदलता है
समय के साथ सोच बदलती है
सोच के साथ साथ
समाज का व्यवहार बदलता है
यह बदला सामाजिक व्यवहार
ज़माना कहलाता है
ज़माना अच्छा या बुरा समय बताता है।
वर्तमान में रह रही पीढ़ी
अपनी पिछली पीढ़ी के विचार
पूर्णरूपेण नहीं अपनाती
कुछ अपनाती कुछ अपना जोड़ती है
जुड़ते हुए यही विचार
व्यवहार और ज़माना बनते हैं
आंखों पर चश्मा हरा लगा हो
सब हरियाला दिखता है
काले शीशों में सब काला ही दिखता है
नज़रिया अपना अपना होता है
ज़माना अच्छा या बुरा नहीं होता।
हमने ज़माने से क्या अपनाया
ज़माने वापिस क्या दिया है
टटोलना होगा अपने आप को
और किसी को क्या तोलना है
औकात अपनी देख
नहीं किसी की जांचनी है
अपनी सोच के सभी मालिक
किसी को नियंत्रित नहीं करना है
गर सबकी सोच बने सार्थक
ज़माना अच्छा कहलाता है
बूंद बूंद से सागर बनता
सबकी सोच ज़माना कहलाता है
ज़माना अपने में अच्छा या बुरा नहीं होता।
बेला विरदी।
