बेवफा इश्क

जानती दुनिया है, जब
पत्थर में होता दिल नहीं,
यार मेरे, फिर क्यों तुम
पत्थर से प्यार करते हो।

क्या कभी पूछा है तुमने
खुद की नजरों से कभी,
हर किसी अंजाने पर
क्यों दिल निसार करते हो।

भूल जा उन यादों को,
जो तुझको तड़फाती रही,
नासमझ, क्यों जिक्र
उसका बार-बार करते हो।

छोड़ कर तन्हां तुझे, जो
हो गए अब अजनबी,
आज भी पूरन, क्यों
उनका इंतजार करते हो।

पूरन ठाकुर जबलपुरी
कल्याण ईस्ट

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