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गलवान पर गोल-मोल नहीं चलेगी! … कांग्रेस ने पूछे मोदी सरकार से ८ सवाल

१) चीन को क्लीनचिट क्यों दी?
२) यथास्थिति समझौते का क्या हुआ?
३) अपने पेट्रोलिंग पोस्ट तक पहुंच क्यों नहीं?
४) भारतीय सेना को बफर जोन जाने से क्यो रोका जा रहा है?
५) क्या १,००० वर्ग किमी इलाका चीनी नियंत्रण में है?
६) क्या हमने ६५ में से २६ प्वाइंट तक पहुंच खोई है?
७) चीन से व्यापार घाटा ९९.२ बिलियन डॉलर तक कैसे पहुंच गया?
८) क्या दुश्मन पाकिस्तान के दोस्त चीन से रिश्ते सामान्य करने की कोशिश हो रही है?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
चीन के साथ सीमा पर हालात से निपटने के तरीके को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर डिनाई, डिस्ट्रैक्ट, लाई, एंड जस्टिफाई (डीडीएलजे) नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने गलवान झड़प और उसके बाद के घटनाक्रम पर ८ महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। रमेश का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उसने राहुल गांधी को सेना पर टिप्पणी करने के मामले में फटकार लगाई है। कांग्रेस नेता ने कहा १५ जून २०२० को गलवान में जब हमारे २० बहादुर सैनिक शहीद हुए, तभी से हर देशभक्त भारतीय के मन में कुछ जरूरी सवाल उठ रहे हैं।

ये हैं ८ सवाल
१- १९ जून २०२० को, यानी गलवान में हमारे सैनिकों की शहादत के महज चार दिन बाद प्रधानमंत्री ने यह क्यों कहा कि ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, ना ही कोई घुसा हुआ है? क्या यह चीन को दी गई क्लीनचिट नहीं थी?
२- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि हम अप्रैल २०२० की यथास्थिति पर लौटना चाहते हैं। क्या २१ अक्टूबर २०२४ को हुआ वापसी समझौता हमें वास्तव में उसी यथास्थिति पर ले जाता है?
३- क्या यह सच नहीं है कि आज भारतीय गश्त दलों को डेपसांग, डेमचोक और चुमार में अपने ही पेट्रोलिंग प्वाइंट तक जाने के लिए अब चीनी सहमति की जरूरत पड़ती है, जबकि पहले वे भारत के क्षेत्रीय अधिकारों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करते थे?
४- क्या यह सही नहीं है कि गलवान, हॉट स्प्रिंग और पैंगोंग झील क्षेत्र में भारतीय गश्ती दलों को उन इलाकों तक पहुंचने से बफर जोन के कारण रोका जा रहा है, जबकि ये बफर जोन भारत के दावे की रेखा के भीतर ही स्थित हैं?
५- क्या २०२० में यह व्यापक रूप से रिपोर्ट नहीं किया गया था कि पूर्वी लद्दाख का लगभग १,००० वर्ग किलोमीटर इलाका चीनी नियंत्रण में आ गया है, जिसमें डेपसांग का ९०० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भी शामिल हैं?
६- क्या यह सच नहीं है कि लेह के पुलिस अधीक्षक ने पुलिस महानिदेशकों के वार्षिक सम्मेलन में एक पेपर प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा गया था कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में ६५ में से २६ पेट्रोलिंग प्वाइंट तक अपनी पहुंच खो दी है?
७- क्या यह सच नहीं है कि चीन से आयात तेजी से बढ़ रहा है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सौर सेल जैसे क्षेत्रों में? भारत का टेलीकॉम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर चीनी आयात पर अत्यधिक निर्भर हो गया है? क्या यह भी सही नहीं है कि २०२४-२५ में चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड ९९.२ बिलियन डॉलर तक पहुंच गया?
८- क्या यह सच नहीं है कि मोदी सरकार आज एक ऐसे देश के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश कर रही है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान को जे-१० सी लड़ाकू विमान और हवा से हवा में मार करने वाली पीएल-१५ मिसाइल जैसी हथियार प्रणालियां प्रदान की थीं और जैसा कि ४ जुलाई, २०२५ को उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा था कि भारतीय सैन्य अभियानों पर लाइव इनपुट भी उपलब्ध कराया।

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