– तीन बार डेडलाइन चूकी ‘ईडी’ सरकार…लागू होने की उम्मीद हुई धुंधली
-मुंबईकरों के लिए छलावा बनी नीति…मनपा दे रही गोलमोल जवाब
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
वर्ष २०२३ में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गरीब मरीजों का बोझ कम करने के लिए जिस ‘जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी’ की घोषणा धूमधाम से की थी। इसके लिए मनपा की ओर से तैयारियां भी जोरदार तरीके से की गर्इं। लेकिन खामियों के चलते तीन सालों में तीन बार नीति लागू करने की डेडलाइन चूक गई है। आलम यह है कि पॉलिसी आज भी कागजों में ही दफन पड़ी हुई है। इसी के साथ ही अब इसके लागू होने की उम्मीद धुंधली हो गई है। मुंबईकरों के लिए जो योजना राहत बनकर आनी थी, वह अब छलावा साबित हो रही है। इस पर मनपा के स्वास्थ्य विभाग की ओर से गोलमोल जवाब देकर टालने की कोशिश की गई है।
गरीब मरीजों की जेब पर बोझ घटाने और मुफ्त दवा उपलब्ध कराने का दावा करने वाली ‘जीरो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी’ अब भी अधर में लटकी है। मनपा ने तीन साल पहले इस नीति को लागू करने का ऐलान किया था, लेकिन अब तक मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। मनपा अधिकारियों के मुताबिक, पॉलिसी में कुल १२ शेड्यूल शामिल हैं, जिनमें से एक शेड्यूल लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और गैस से जुड़ा था। इस पर रेड सर्वुâलर जारी कर इसे पांच साल के लिए लागू कर दिया गया है, लेकिन बाकी दवाइयां और उपकरण अब भी प्रक्रिया में ही फंसे हुए हैं।
महाटेंडर की जटिलता
मनपा ने करीब ४,००० आइटम्स का महाटेंडर एक साथ निकाला। इसमें बोलीदाता सभी १२ शेड्यूल के लिए या फिर अलग-अलग संयोजन में कोटेशन दे सकते थे। इसी जटिल प्रक्रिया के कारण समय लगा और अब तक सिर्फ ५०-६० फीसदी वस्तुओं पर ही बोली प्राप्त हुई है।
रेड सर्कुलर का खेल
मनपा अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब ६० फीसदी दवाइयों पर बोली मिल चुकी है। जितनी भी दवाओं और सामग्री पर रेड सर्कुलर जारी होते हैं, उनके आधार पर अस्पताल परचेज ऑर्डर कर अगले २-३ साल की सप्लाई सुनिश्चित कर लेते हैं। अब तक ५० रेड सर्कुलर जारी हुए हैं और आने वाले दिनों में और जारी होने की बात कही जा रही है। फिलहाल जो दवाइयां इस प्रक्रिया से बाहर हैं, उनकी लोकल परचेज की जा रही है। इसी के साथ ही अगले १५ दिनों में २००-२५० और रेड सर्वुâलर जारी करने का दावा किया गया है।
मनपा का बचाव
मनपा का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट एग्जिक्यूशन में देरी हुई तो मेडिको-लीगल मामले सामने आ सकते हैं, इसलिए पहले कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि अगले दो-तीन साल की दवा सप्लाई रेड सर्वुâलर से बुक हो जाएगी।
बाहरी मरीजों पर पेच
अधिकारियों का कहना है कि मुंबई के मरीजों की परिभाषा तय की गई है, जिनमें मनपा क्षेत्र में रहने वाले, राशन कार्डधारक, बीपीएल कार्डधारक और बीएमसी कर्मचारी शामिल हैं। वहीं, बाहर से आने वाले मरीज अगर किसी योजना या स्कीम में कवर हैं तो उन्हें सुविधा मिलती है। लेकिन सभी बाहरी लोगों को बिना शर्त लाभ देने की कोई नीति नहीं है।
दिक्कतें बरकरार
मनपा ने एक अगस्त से ‘आपली चिकित्सा’ योजना भी शुरू की है, जिसके तहत रोजाना हजारों टेस्ट मुफ्त किए जा रहे हैं और रिपोर्ट्स सीधे व्हॉट्सऐप पर भेजी जा रही हैं। हालांकि, दवाओं की कमी और उपकरणों की समस्या अभी भी बनी हुई है।
