मुख्यपृष्ठनए समाचारआज है विश्व अल्जाइमर दिवस...महाराष्ट्र पर डिमेंशिया का हमला!

आज है विश्व अल्जाइमर दिवस…महाराष्ट्र पर डिमेंशिया का हमला!

-शहर में रोग से जूझ रहे ७०,००० मरीज कई मरीज चपेट में, पर हैं अनजान

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस वजह से राज्य इस मानसिक स्वास्थ्य संकट की चपेट में है। एक अनुमान के अनुसार राज्य में ४-५ लाख लोग इस रोग से प्रभावित हैं, जबकि केवल मुंबई शहर में ही लगभग ५०,००० से ७०,००० लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। इनमें से कई मरीज पूरी तरह अनजान हैं कि वास्तव में वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। तेजी से फैलते इस रोग ने परिवारों, समाज और स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव डाल दिया है।
उल्लेखनीय है कि विश्वभर में ५५ मिलियन से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं। इसके साथ ही वर्ष २०५० तक यह संख्या तीन गुना होने की संभावना है। एक आंकड़े के मुताबिक, अकेले हिंदुस्थान में ही ४० लाख से अधिक लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं, जिससे यह एक बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गई है। मुंबई के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. निर्मल सूर्या ने कहा कि अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है, जो धीरे-धीरे स्मृति, सोच और दैनिक कार्यों को प्रभावित करता है। यह मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करता है। लेकिन इसका असर परिवारों, देखभाल करनेवालों और समाज पर भी गहरा पड़ता है।
अल्जाइमर के लक्षण
डॉ. सूर्या ने कहा कि अल्जाइमर अकसर इन संकेतों के साथ शुरू होता है, जिसमें नाम या हाल की घटनाओं को भूलना, सामान को गलत जगह रखना, आर्थिक या दैनिक कार्यों को संभालने में कठिनाई, मूड या व्यक्तित्व में बदलाव जैसे सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। इसके बाद के चरणों में भ्रम, बोलने में कठिनाई और पूर्ण निर्भरता दिखाई देती है।
डॉ. निर्मल सूर्या ने कहा कि सभी डिमेंशिया को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन कुछ कदम जोखिम कम कर सकते हैं। इसमें मधुमेह, रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना, नियमित व्यायाम व संतुलित आहार, मस्तिष्क को सक्रिय रखना, पढ़ना, पहेलियां हल करना, नए कौशल सीखना, सामाजिक रूप से जुड़े रहना, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना शामिल हैं।
यह है उपचार विकल्प
हालांकि, इसका कोई पूर्ण इलाज नहीं है, उपलब्ध दवाइयां लक्षणों को धीमा कर सकती हैं। गैर-दवा आधारित उपाय जैसे संज्ञानात्मक प्रशिक्षण, फिजियोथेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा और देखभालकर्ता परामर्श भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल्दी पहचान से परिवारों को देखभाल और समर्थन योजना बनाने में मदद मिलती है।

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