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ठाणे-नई मुंबई हवाई अड्डे के बीच की यात्रा पड़ेगी महंगी! …छह लेन की एलिवेटेड रोड पर सरकार जमकर वसूलेगी टोल

सामना संवाददाता / मुंबई
नई मुंबई में जल्द ही शुरू होने वाले अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए ठाणे निवासियों के लिए लगभग ६,३६३ करोड़ रुपए की लागत से छह लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इससे ठाणे निवासी बिना ट्रैफिक जाम की परेशानी के कम समय में हवाई अड्डे तक पहुंच सकेंगे, लेकिन उन्हें एकतरफ की यात्रा के लिए चार पहिया वाहन (कार) के लिए ३६५ रुपए का टोल देना होगा। बताया जाता है कि २०३१ में इस परियोजना के पूरा होने के बाद टोल लगाया जाएगा।
ठाणे से हवाई अड्डे तक चार पहिया हल्के वाहन (कार) के लिए एकतरफ की यात्रा पर ३६५ रुपए टोल ल्ागेगा। हल्के वाहनों के लिए ५९० रुपए, ट्रकों और बसों के लिए १,२३५ रुपए टोल वसूले जांएगे। इसके अलावा हर साल टोल की दरों में बृद्धि की जाएगी।
बता दें कि नई मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और संभावना है कि एक महीने के भीतर यह हवाई अड्डा चालू हो जाएगा। हवाई अड्डे के चालू होने के बाद, हर साल २० लाख यात्री हवाई अड्डे का उपयोग करेंगे। २०३८ में हवाई अड्डे के पूरी क्षमता से चालू होने के बाद, लगभग ९० लाख यात्री इस हवाई अड्डे से आ-जा सकेंगे। ठाणे, डोंबिवली, कल्याण-अंबरनाथ-बदलापुर, भिवंडी, भायंदर क्षेत्रों के यात्रियों द्वारा इस हवाई अड्डे का अधिक उपयोग किए जाने की संभावना है।

ट्रैफिक जाम की है गंभीर समस्या
वर्तमान में नई मुंबई-ठाणे क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर है। इसलिए यात्रियों को ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए ठाणे से नई मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक एक एलिवेटेड रोड बनाने का निर्णय कल वैâबिनेट की बैठक में लिया गया। अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी ने इस परियोजना का प्रारुप तैयार किया है और यह ठाणे के विटावा नाका-पटनी मैदान से हवाई अड्डे तक २५ किलोमीटर लंबी छह लेन की एलिवेटेड रोड होगी। ६,३६३ करोड़ रुपए की अनुमानित लागत को मंजूरी दी गई। यह परियोजना सिडको द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर कार्यान्वित की जाएगी। सिडको को उम्मीद थी कि ठाणे और नई मुंबई मनपा इस परियोजना की लागत का १०-१० प्रतिशत और एमआईडीसी ५ प्रतिशत वहन करेगा। लेकिन इन तीनों संस्थाओेंं ने वित्तीय भार वहन करने से इनकार कर दिया है। उक्त संस्थाओं के इनकार करने के बाद अब ६० प्रतिशत सिडको, २० प्रतिशत राज्य सरकार और २० प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार के माध्यम से वहन किया जाएगा।

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