-शिक्षा का गढ़ समझे जानेवाला पुणे सबसे ऊपर
-राज्य के ३९४ स्कूलों में नामांकन शून्य
सामना संवाददाता / मुंबई
हर किसी के जीवन में शिक्षा का बहुत महत्व होता है। लेकिन महायुति सरकार के राज्य में अब स्थिति यह है कि स्कूल तो हैं, मगर उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थी ही नहीं हैं। यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि राज्य के ३९४ स्कूलों में नामांकन शून्य हो चुका है। इसमें शिक्षा का गढ़ समझे जानेवाले पुणे का नंबर सबसे ऊपर है। ‘यू-डाइस प्लस’ पर ३० सितंबर तक के पंजीकरण की संख्या के अनुसार राज्य के ३९४ स्कूलों में किसी भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं हुआ है। करीब ८,००० स्कूलों में १० से भी कम छात्र पढ़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्कूल खाली हो रहे हैं, यह गंभीर हकीकत सामने आई है।
राज्य में कुल २ करोड़ ११ लाख ८६ हजार ९४३ विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ७,००० ज्यादा है। मगर इसी दौरान करीब ५ लाख विद्यार्थियों का नामांकन अधूरा है। ऐसे में अनुमान है कि संख्या लाखों में बढ़ेगी। लेकिन दूसरी ओर ग्रामीण स्कूल खाली होने की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार पुणे में सबसे ज्यादा ३७ स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं हैं। इसी तरह रत्नागिरी के २४, नागपुर के २३ स्कूलों में एक भी छात्र नहीं हैं। बुलढाणा के २१ स्कूलों में भी यही स्थिति है। रत्नागिरी जिले के ७१३ स्कूलों में १० से कम छात्र हैं। पुणे में ६२७, रायगढ़ में ६८२ और सिंधुदुर्ग में ५६९ स्कूलों में भी इतनी ही कम संख्या में छात्र हैं।
मुंबई के ३९४ स्कूलों में १० से कम है छात्रों की संख्या
मुंबई उपनगर के ३६०, मुंबई शहर के ३४, ठाणे के १९९ और पालघर के १२४ स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या १० से कम है। अन्य जिलों में कहीं २०० से ३००, तो कहीं १०० से १५० स्कूल इस श्रेणी में आते हैं। पूरे राज्य में कुल ७,९४६ स्कूलों में सिर्फ १ से १० छात्र ही दर्ज हुए हैं।
