राधेश्याम सिंह / वसई
मानसून की बारिश ने वसई-विरार की सड़कों की बदहाली एक बार फिर उजागर कर दी है। मुख्य और आंतरिक मार्गों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों तथा जलभराव से वाहन चालकों और पैदल यात्रियों का सफर मुश्किल और जोखिमभरा हो गया है। लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी है।
बारिश शुरू होते ही कई सड़कों पर एक से डेढ़ फुट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। जलभराव के कारण ये गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब ड्रेनेज व्यवस्था के कारण हर वर्ष यही स्थिति पैदा होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। वसई पूर्व का गावराईपाड़ा क्षेत्र प्रमुख औद्योगिक इलाका है, जहां प्रतिदिन हजारों मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी और विद्यार्थी आवागमन करते हैं। सड़कों की जर्जर स्थिति का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ रहा है। कई बस मार्ग प्रभावित हुए हैं और कुछ स्थानों पर बसों का संचालन अस्थायी रूप से बाधित होने से लोगों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय नागरिकों और आंदोलनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी गड्ढों की तत्काल उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से मरम्मत कराई जाए तथा बारिश के बाद प्रमुख मार्गों को चरणबद्ध तरीके से सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) सड़कों में बदला जाए, ताकि हर मानसून में दोहराई जाने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
उद्योग-धंधे और बस सेवा भी प्रभावित
गावराईपाड़ा औद्योगिक क्षेत्र की जर्जर सड़कों से सार्वजनिक परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई बस मार्ग बाधित हैं। नागरिकों ने सभी गड्ढों की तत्काल मरम्मत, गुणवत्तापूर्ण डामरीकरण और प्रमुख सड़कों को स्थायी रूप से सीसी सड़क में बदलने की मांग की है।
हादसों का बढ़ा खतरा
बारिश ने वसई-विरार की सड़कों की बदहाली उजागर कर दी है। एक से डेढ़ फुट गहरे गड्ढों और जलभराव से वाहन चालकों व राहगीरों का सफर जोखिमभरा हो गया है। लगातार शिकायतों के बावजूद मरम्मत नहीं होने से लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है।
