मुख्यपृष्ठग्लैमरभाजपा को जिताने के लिए कटेंगे १५ करोड़ वोट?

भाजपा को जिताने के लिए कटेंगे १५ करोड़ वोट?

-चुनाव आयोग का `एसआईआर घोटाला’
-योगेंद्र यादव के दावे से चुनावी सियासत में भूचाल

सामना संवाददाता/ नई दिल्ली
चुनाव आयोग की मतदाता सूची में संशोधन के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रो. मुकेश कुमार के साथ एक विशेष साक्षात्कार में यादव ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के जरिए देशभर में करीब १५ करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा है। उनका दावा है कि इसका सबसे ज्यादा असर मुस्लिम, दलित, आदिवासी और गरीब तबके के मतदाताओं पर पड़ सकता है।
योगेंद्र यादव ने कहा कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए तो इसका सीधा असर चुनावी अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। उनके इस दावे से सियासी भूचाल आ गया है। विपक्ष में भी इस मुद्दे को लेकर सरकार का घेराव किया है।
योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में जिस तरह बदलाव किया जा रहा है, उसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सवाल उठाया कि यदि करोड़ों मतदाताओं के नाम हटते हैं तो चुनाव की निष्पक्षता पर भरोसा वैâसे कायम रहेगा।

वोट काटने का बनाया जा रहा पैटर्न
योगेंद्र यादव के मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया केवल सामान्य प्रशासनिक कवायद नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान ऐसे मतदाताओं के नाम निशाने पर आ सकते हैं, जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं या जो प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई का सामना करते हैं।

ईसी पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त भी लगा चुके हैं गंभीर आरोप
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने वाले योगेंद्र यादव अकेले नहीं हैं। कुछ दिन पहले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस़ वाय. कुरैशी ने भी अलग-अलग मौकों पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मतदाता सूची में बदलाव से लेकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता तक कई मुद्दों पर आयोग की भूमिका सवालों के घेरे में रही है।

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