सोशल मीडिया ने जगाई पुलिस की नींद
जेदवी / मुंबई
कभी महिलाओं के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली मुंबई आज महिला सुरक्षा केवल कागजों में सिमटी हुई दिख रही है। महायुति सरकार आने के बाद से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, स्थिति यह है कि पुलिस की नींद टूटने तक घटनाएं घट चुकी होती हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी तो कर दिए जाते हैं, पर मदद देने वाले हाथ मायूस कर देते हैं। असली परीक्षा मुसीबत की घड़ी में होती है, ताजा मामला इस सच्चाई को फिर उजागर करता है।
गोरेगांव-पश्चिम में २२ वर्षीय महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना ने शहर को झकझोर दिया। पीड़िता ने ‘एक्स’ (ट्विटर) पर अपनी आपबीती साझा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली। पोस्ट वायरल हुई तो गोरेगांव पुलिस की नींद टूटी और फिर २४ घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाने लगी।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान २७ वर्षीय कुलदीप कनौजिया के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बस्ती का निवासी है और गोरेगांव पश्चिम स्थित एक प्लास्टिक पैâक्ट्री में मजदूर के तौर पर काम करता था। आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने इलाके के ७०–८० सीसीटीवी वैâमरों के फुटेज खंगाले और एक सुरक्षा गार्ड से मिली सूचना के आधार पर उसे दबोच लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, लेकिन बड़ा सवाल जस का तस है कि पुलिस हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करने के बावजूद मदद क्यों नहीं मिली? पुलिस ने अब इस पहलू की जांच शुरू की है कि पीड़िता की कॉल का जवाब क्यों नहीं दिया गया।
मुंबई पुलिस सोशल मीडिया पर सक्रियता दिखा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह साफ करती है कि जब तक हेल्पलाइन सिस्टम मजबूत नहीं होगा, तब तक महिला सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजों पर ही अच्छे लगेंगे।
