-मनपा आयुक्त ने दिए कंजेक्शन टैक्स के संकेत लोगों ने कहा, पहले जाम खत्म करो, फिर टैक्स की बात करो
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबईकर पहले ही रोजाना घंटों जाम, अधूरे सड़कों के काम और बदहाल यातायात व्यवस्था से जूझ रहे हैं। अब पीक ऑवर में गाड़ी लेकर निकलने पर कंजेक्शन टैक्स लगाने के संकेत ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। मनपा आयुक्त के इस प्रस्ताव पर सवाल उठ रहा है कि जब शहर को जाम से राहत नहीं मिल रही, तो उसकी कीमत भी मुंबईकर ही क्यों चुकाएं?
मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे के बयान से इस संभावित नए आर्थिक बोझ की चर्चा तेज हो गई है। आयुक्त भिडे ने कहा कि यदि मुंबई में मजबूत और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो जाए तो कुछ इलाकों में कंजेशन प्राइसिंग लागू करने पर विचार किया जा सकता है। यानी जिन रास्तों पर पहले से ही घंटों जाम में फंसना पड़ता है, वहां भविष्य में वाहन लेकर निकलने के लिए मुंबईकरों को अलग से अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। मुंबईकरों का सवाल सीधा है जब सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अभी भी कई मोर्चों पर दबाव में है, तो टैक्स लगाने की बात इतनी जल्दी क्यों? रोजाना लोकल, बेस्ट बसों, मेट्रो और सड़कों पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों को सुविधाजनक, समयबद्ध और भरोसेमंद विकल्प देने के बाद ही निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने की नीति उचित होगी।
जाम भी सहो और टैक्स भी भरो
मुंबई की सड़कों पर पीक ऑवर में रोजाना लगने वाले जाम के लिए केवल वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराना आसान है। लेकिन खराब सड़क नियोजन, अधूरे निर्माण कार्य, जगह-जगह चल रहे इंप्रâास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, पार्किंग की समस्या और सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ता दबाव भी यातायात संकट के बड़े कारण हैं। ऐसे में मुंबईकरों के सामने नया सवाल खड़ा हो गया है क्या पहले उन्हें घंटों जाम में फंसाया जाएगा और फिर उसी जाम से निकलने के लिए उनसे कंजेशन टैक्स भी वसूला जाएगा?
