प्रेम यादव / भायंदर
मीरा-भायंदर में मानसून की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर सड़कों की जर्जर हालत सामने आ गई है। भायंदर-पूर्व के गोल्डन नेस्ट सर्कल की मस्जिद से लेकर सालासर बिल्डिंग परिसर तक महज ४०० कदम की दूरी में १३३ गड्ढे पाए गए हैं। यह रास्ता क्षेत्र का एक प्रमुख मार्ग है, जहां से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। गड्ढों में भरे बारिश के पानी से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। टूटी-फूटी सड़कों ने वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल बरसात से पहले मनपा पैचवर्क के नाम पर खानापूर्ति करती है। लेकिन जैसे ही पहली बारिश होती है, सड़कों की असलियत सामने आ जाती है। गड्ढों की भराई के नाम पर लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए नागरिकों ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मेट्रो निर्माण के चलते पहले ही सड़कें संकरी और बाधित हैं, ऊपर से गड्ढों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। वाहन चलाते समय हादसों का डर अब आम हो गया है। दोपहिया चालक फिसलते हैं, पैदल राहगीर गिरते हैं और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सड़कों पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं।
नागरिकों ने की स्थाई समाधान की मांग
मनपा प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस छोटी सी दूरी में ही १३३ गड्ढे मौजूद हैं। इससे जाहिर होता है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितताएं हुई हैं। ऐसे में नागरिकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे जल्द से जल्द स्थाई समाधान की मांग कर रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि पूरे शहर की सड़कों की दुर्दशा का प्रतीक बन चुका है।
हर साल मनपा सिर्फ मरम्मत के नाम पर पैसे उड़ाती है। गड्ढे कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं। लगता है किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा।
-अंकुश मालुसरे (सामाजिक कार्यकर्ता)
