राधेश्याम सिंह / वसई
वसई-विरार और मीरा-भायंदर क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। जनवरी २०२५ से जून २०२५ तक के छह महीनों में पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में २१ हत्या के मामले सामने आए हैं, जबकि ३३ लोगों पर जानलेवा हमले हुए, लेकिन वे बाल-बाल बच गए। हत्या और हत्या के प्रयासों की ये घटनाएं चौंकाने वाली इसीलिए हैं, क्योंकि इनमें ज्यादातर मामले नशे, गुस्से, प्रेम संबंध, पैसों के लेन-देन या पुरानी दुश्मनी जैसे कारणों से जुड़ी हैं। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी और फरव में ३-३ मार्च में सबसे ज्यादा ७ अप्रैल और जून में ४-४ हत्याएं दर्ज हुईं, जबकि मई में कोई हत्या नहीं हुई। गंभीर अपराधों की बात करें तो हर महीने औसतन ५ से ७ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें चाकू से हमला, अपहरण या बलात्कार जैसे अपराध शामिल हैं। पुलिस ने सभी हत्या के मामलों को सुलझा लिया है, लेकिन अपराध की वजहों पर गौर करें तो तस्वीर और भी खतरनाक नजर आती है। इन घटनाओं में कई बार वजह इतनी मामूली होती है कि विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। दोस्तों के बीच बहस, शराब पार्टी में झगड़ा, वाहन टकरा जाने पर गुस्सा या फिर सिर्फ घूरकर देखने जैसी बातों पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। कई मामलों में आरोपी और पीड़ित पहले एक-दूसरे के दोस्त रहे हैं। एक केस में तो बर्थडे पार्टी के दौरान नशे में हुए झगड़े के बाद युवक पर चाकू से हमला कर दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। यह घटना पापडी इलाके की है, जहां लोहिया नगर में रहने वाले आकाश पवार की उसके दोस्त मनीष पांडे ने चाकू मारकर हत्या कर दी। पार्टी में शराब के नशे में हुई बहस के बाद मनीष ने आकाश और राहुल भुरकुड पर हमला कर दिया था। आकाश की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि राहुल गंभीर रूप से घायल हुआ। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों के पीछे गुस्से पर नियंत्रण न होना एक बड़ा कारण है। कई बार लोग गुस्से में इतना बह जाते हैं कि छोटी-सी बात पर चाकू तक निकाल लेते हैं। इसलिए समाज में मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और गुस्से को कंट्रोल करने की ट्रेनिंग की जरूरत बताई जा रही है। पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र को तीन परिमंडलों में बांटा गया है और यहां कुल १९ पुलिस थाने हैं। प्रत्येक परिमंडल में एक डीसीपी और एक एसीपी नियुक्त है, जो अपने-अपने क्षेत्र में अपराध पर नजर रखते हैं। इसके अलावा गुन्हे शाखा, अंमली पदार्थ विरोधी पथक, अनैतिक मानवी तस्करी विरोधी पथक जैसी टीमें भी सक्रिय हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या, अपहरण, बलात्कार जैसे गंभीर मामलों की जांच को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन छोटे झगड़े या विवादों पर तुरंत ध्यान न देने से वही बाद में गंभीर अपराध में तब्दील हो जाते हैं। नाबालिगों की आपराधिक गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। छह महीनों में सामने आए इन आंकड़ों ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज को भी चेतावनी दी है कि यदि वक्त रहते गुस्से, नशे और सामाजिक अव्यवस्थाओं पर काबू नहीं पाया गया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
