-वसई, विरार व नालासोपारा में दिखा व्यापक असर
-बुजुर्ग व ऑफलाइन ग्राहक हुए परेशान
राधेश्याम सिंह / वसई
ऑनलाइन दवाओं की बढ़ती बिक्री, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कथित उल्लंघन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाए जा रहे फर्जी प्रिस्क्रिप्शन व नकली बिलों के विरोध में ‘अखिल भारतीय औषध विक्रेता संघटना’ द्वारा बुलाए गए देशव्यापी बंद का असर बुधवार को वसई-विरार शहर में व्यापक रूप से देखने को मिला। वसई तालुका के करीब २ हजार २०० मेडिकल दुकानदारों ने इस आंदोलन में भाग लेते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। मेडिकल स्टोर बंद रहने से आम नागरिकों को दवाइयां खरीदने के लिए घंटों भटकना पड़ा, वहीं कई लोगों ने मजबूरी में ऑनलाइन दवाएं मंगाने का विकल्प चुना।
बंद का असर शहर के रेलवे स्टेशन परिसर, बाजार क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर साफ दिखाई दिया। वसई, विरार और नालासोपारा के कई इलाकों में छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। जानकारी के मुताबिक, वसई और नालासोपारा क्षेत्र में मिलाकर केवल २० मेडिकल दुकानें ही खुली थीं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को सामान्य दवाइयों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
दवा विक्रेताओं ने लगाए आरोप
दवा विक्रेताओं का आरोप है कि देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के दवाइयां बेची जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इसके अलावा एआई तकनीक के जरिए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन और नकली बिल तैयार किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जो मेडिकल क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं।
सख्त नियम बनाए सरकार
वसई मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष महेश चौधरी ने कहा कि सरकार को ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त नियम लागू करने चाहिए, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लग सके और मरीजों को सुरक्षित दवाइयां मिल सकें। फिलहाल, इस आंदोलन के चलते वसई-विरार शहर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परेशानियां देखने को मिलीं, हालांकि दवा विक्रेताओं ने इसे मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
‘ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे मेडिकल दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। वसई तालुका के करीब २ हजार २०० मेडिकल दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन में सहभाग दर्ज कराया है।’
-महेश चौधरी (अध्यक्ष-वसई मेडिकल असोसिएशन)
