सूफी खान
यमन के हूती ईरान-अमेरिका जंग के बाद से शांत थे, लेकिन अब यमन की राजधानी सना में फिर वही हुजूम और नजर आने लगा है। मिडिल ईस्ट में फिर बन रहे जंग के हालात के बीच यमन के अंसारुल्लाह ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। कुरान और इस्लाम के प्रतीक चिह्न लेकर यमन के हूतियों ने राजधानी सना के अल सबीन स्क्वेयर पर फिलिस्तीन, लेबनान और ईरान के लिए अपने संकल्प का एक बार फिर इजहार कर दिया है। एक्सपर्ट कहते हैं कि यमन में हूतियों का यूं उमड़ना क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल को सीधी चेतावनी माना जा रहा है।
गौरतलब है कि ईरान हिमायती यमन के अंसारुल्लाह इजरायल की नाक में पहले भी दम कर चुके हैं। जब तक इजरायल गाजा में हमलावर रहा, तब तक हूती लगातार इजरायल पर हमलावर रहे। ईरान-अमेरिका-इजरायल ४० दिनों की जंग में हूती खामोश थे, लेकिन उन्होंने लाल सागर पर मौजूद अहम समुंदरी रास्ते बाब अल मंदब पर ईरान के समर्थन में चेतावनी जारी कर दी थी। अगर अमेरिका ने होर्मुज पर जोर-जबरदस्ती की तो सऊदी, इजरायल और अन्य अरब देशों के तेल निर्यात का अहम रास्ता बाब अल मंदब वे बंद कर देंगे।
होर्मुज में जैसे ईरान का कंट्रोल है, वैसे ही बाब अल मंदब पर अंसारुल्लाह का। लाल सागर पर हूतियों से अमेरिका भी नहीं निपट पाता। यमन के अंसारुल्ला ईरान के एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस का अहम हिस्सा हैं और हूतियों के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार भी हैं, जो इजरायल तक पहुंच जाते हैं। एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच इस बार जंग छिड़ी तो ईरान के सारे प्रॉक्सी इसमें कूद पड़ेंगे। ये आर-पार की लड़ाई होगी और लंबी चलेगी। यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह, इराक के हशदुश्शाबी और ४० से ज्यादा हथियार बंद संगठन इस जंग में होंगे। ४० दिनों की जंग में ईरान अकेला अमेरिका और इजरायल से निपट रहा था। इस बार वो अपनी चौतरफा ताकत दिखा सकता है, जो उसके प्रॉक्सी की वजह से कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है।
