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भारत रसोई गैस का कोई लॉन्‍गटर्म स्‍टोरेज नहीं…देश में एलपीजी के लिए हाहाकार!

-रोजाना ४ लाख बैरल की सप्लाई कम

-निक्केई एशिया की रिपोर्ट से हड़कंप

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज का रास्‍ता बंद होने के कारण दुनियाभर में एनर्जी संकट बना हुआ है। इस तनाव के कारण कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो वहीं भारत में भी कीमतों में इजाफा हुआ है।
भारत में एक सप्ताह में ही पेट्रोल-डीजल के दाम दो बार बढ़ाए गए हैं। साथ ही एलपीजी की कीमतों भी भारी बढ़ोतरी हुई है। उधर निक्केई एशिया की रिपोर्ट से हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एलपीजी के लिए हाहाकार मच सकता है, क्योंकि देश में रसोई गैस के लिए कोई लॉन्‍गटर्म स्‍टोरेज ही नहीं है।
भारत एलपीजी का तीसरा सबसे बड़ा कंज्‍यूमर
अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एलपीजी का तीसरा सबसे बड़ा कंज्‍यूमर भारत, हर दिन ४ लाख बैरल की आपूर्ति कमी का सामना कर रहा है। निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें आंकड़ों के लिए केप्लर का हवाला दिया गया है, अप्रैल में भारत का एलपीजी आयात ३७७,६२० बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी में आयात किए जा रहे ८५१,८७० बैरल प्रतिदिन से काफी कम है। तब होर्मुज पूरी तरह से चालू था।
एलपीजी सरेंडर करने के लिए ३ महीने का वक्‍त
पश्चिम एशिया में जंग के बाद स्थिति बिगड़ी है। इस संकट के बीच, सरकार आपूर्ति संकट को कम करने के लिए उपाय कर रही है। उसने पाइपलाइन से पीएनजी कनेक्शन वाले परिवारों से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने को कहा है। सरकार ने ऐसे परिवारों को एलपीजी कनेक्शन बंद करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इसके लिए सरकार ने ‘एक परिवार, एक कनेक्शन’ का नियम लागू किया है, जिसके तहत एक ही परिवार के पास पीएनजी और सब्सिडी वाली घरेलू एलपीजी दोनों का होना अवैध है।
सरकार ने मार्च की शुरुआत में १४.२ किलोग्राम के रेगुलर एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ६० रुपए की बढ़ोतरी भी की थी। ११ मई को देश के पास ४५ दिनों का रोलिंग स्टॉक था, साथ ही कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का ६०-६० दिनों का स्टॉक भी था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने एलपीजी की खरीद में विविधता लाने की भी कोशिश की है और ईरान, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और चिली से एलपीजी खरीदी है, जिन्होंने अप्रैल में प्रतिदिन ४३,००० बैरल एलपीजी की आपूर्ति की, जो फरवरी में शून्य थी। यह आंकड़ा मिडिल ईस्‍ट के चार आपूर्तिकर्ताओं द्वारा हरदिन भेजे जाने वाले ६७८,००० बैरल की तुलना में काफी कम है और दूरी भी एक महत्वपूर्ण कारक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया से भारत को आपूर्ति पहुंचने में लगभग २० दिन लगते हैं, जबकि अर्जेंटीना और संयुक्त राज्य अमेरिका से निर्यात को ३५-४५ दिन लग सकते हैं। अप्रैल में भारत को यहां से हरदिन १४९,००० बैरल का गैस आया था.
गौरतलब है कि भारत एलपीजी का कोई लॉन्‍गटर्म स्‍टोरेज नहीं रखता है और अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग दो-तिहाई आयात करता है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब भारत के एलपीजी आयात का लगभग ८० प्रतिशत हिस्सा पेश करते हैं।

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