मुख्यपृष्ठनए समाचारबिना नोटिस 35 श्रमिकों को निकाला... महीनों का वेतन बकाया...कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

बिना नोटिस 35 श्रमिकों को निकाला… महीनों का वेतन बकाया…कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

राजेश सरकार / प्रयागराज

प्रयागराज के बारा थाना क्षेत्र के रेही गांव स्थित जेपी सीमेंट प्रोडक्ट टीन सीट कंपनी में औद्योगिक अशांति गहरा गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से निकाले जाने और महीनों का वेतन न मिलने से नाराज मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को लगातार 9वें दिन भी जारी रहा। कंपनी प्रबंधन के अड़ियल रुख से गुस्साए श्रमिकों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी है।
वादाखिलाफ़ी से बढ़ा आक्रोश
धरने पर बैठे पीड़ित मजदूरों ने बताया कि प्रबंधन ने उन्हें 16 जुलाई तक बकाया मानदेय भुगतान और समस्याओं के समाधान का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया था। अधिकारियों के इस भरोसे पर श्रमिकों ने उम्मीद जताई थी, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी ढाक के तीन पात रहे। शुक्रवार 17 जुलाई को जब मजदूरों को खाली हाथ रहना पड़ा, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। श्रमिक दोबारा एकजुट होकर कंपनी के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
चूल्हा जलना हुआ दूभर, फांकाकसी का संकट गहराया
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, कंपनी ने अचानक लगभग 35 श्रमिकों को बिना किसी वैध कारण के रोजगार से बेदखल कर दिया। ऊपर से पिछले कई महीनों की गाढ़ी कमाई का मानदेय भी रोक रखा है। आंदोलनरत मजदूरों का कहना है कि उनके परिवारों का भरण-पोषण पूरी तरह से इसी मजदूरी पर टिका है। वेतन न मिलने और नौकरी जाने से उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। बच्चे भुखमरी की कगार पर हैं और वे गहरे संकट से जूझ रहे हैं। पिछले 9 दिनों से वे शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
प्रबंधन साधे है चुप्पी, प्रशासन से आस
हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों से चल रहे इस बड़े विवाद के बावजूद कंपनी प्रबंधन या संबंधित श्रम विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। जिम्मेदार अधिकारियों की यह चुप्पी श्रमिकों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
कलेक्ट्रेट कूच की तैयारी
मजदूरों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाए का तत्काल भुगतान नहीं हुआ और उन्हें काम पर वापस नहीं लिया गया, तो वे अपना आंदोलन उग्र करेंगे। पीड़ित श्रमिक सामूहिक रूप से जिलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचकर विशाल प्रदर्शन करेंगे और सीधे जिला प्रशासन से न्याय की मांग करेंगे। फिलहाल, मजदूरों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा, जिससे उनका रोजगार सुरक्षित हो सके और उनका हक मिल सके।

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