जिस प्रधानमंत्री मोदी ने सोनम वांगचुक को अपने जिस राजनीतिक स्वार्थ के लिए सिर आंखों पर बिठाया था, आज उसी वांगचुक के खिलाफ भाजपा बदनामी की मुहिम चला रही है। ‘नीट’ परीक्षा के पेपर लीक मामले के विरोध में और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। २० दिन बीत जाने के बाद भी उनकी भूख हड़ताल जारी है। किसी भी हाल में पीछे न हटने का उनका पक्का इरादा है, जिद है। देश के लिए बलिदान देने के जज्बे के साथ ही वांगचुक ‘जंतर-मंतर’ के मैदान में उतरे हैं। वांगचुक के इस आंदोलन ने सरकार को दुविधा में डाल दिया है, लेकिन मोदी का अहंकार धर्मेंद्र प्रधान को बचा रहा है। जब यह समझ आ गया कि वांगचुक झुकनेवाले नहीं हैं तो भाजपा ने उनके खिलाफ कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, ‘कौन वांगचुक? वह आम आदमी गैंग के सदस्य हैं। भारत के विकास में वांगचुक रोड़े अटका रहे हैं। जनता उन्हें सबक सिखाएगी।’ अब ये सब बातें कह कौन रहा है? मनोज तिवारी! भोजपुरी फिल्मों में अश्लील और फूहड़ गानों पर नाचनेवाला यह इंसान ऐसी बातें कर रहा है और भाजपा की तरफ से मनोज तिवारी को रोका तक नहीं जा रहा। ये वे लोग हैं, जो राम मंदिर में हुई चोरी का भी बचाव करते हैं। इनसे भला और क्या उम्मीद की जा सकती है? ‘मंदिर की दानपेटी का पैसा हिंदुओं ने ही तो चुराया है, तो फिर किसी के पेट में दर्द क्यों होना चाहिए?’, ऐसा कुतर्क देनेवाले लोग आज सोनम वांगचुक के खिलाफ बोल रहे हैं। ‘नीट’ परीक्षा के पेपर लीक होने से देश के लाखों छात्र डिप्रेशन में चले गए। २०-२५ छात्रों ने आत्महत्या कर ली, लेकिन मोदी राज में इंसानी जान की कोई कीमत नहीं बची है इसलिए छात्र मरते हों तो मरें, किसान मरते हों तो मरें, पुलवामा में भारतीय सैनिक मरते हों तो मरें, कश्मीर में सैलानी मरते हों तो मरें… इन लोगों को जनता की मौत से कोई सरोकार नहीं है। यही वजह है कि २०वें दिन के कड़े उपवास से पूरी तरह जर्जर हो चुके वांगचुक को लेकर
भाजपा की संवेदनाएं मर चुकी
हैं। वांगचुक के साथ नेहा नाम की एक छात्रा भी पिछले २० दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी है। डॉक्टरों को चिंता है कि अगर उसका उपवास एक दिन भी आगे बढ़ा, तो उसकी जान जा सकती है। लेकिन क्या ऐसी कोई चिंता प्रधानमंत्री मोदी को है? मोदी का यह बर्ताव असल में बुरी सोहबत का नतीजा है। गाजा पट्टी में ५० हजार मासूम बच्चों का कत्लेआम करनेवाले नेतन्याहू और ईरान के स्कूल पर बम गिराकर २०० बच्चों की जान लेने वाले राष्ट्रपति ट्रंप जैसे हुक्मरान प्रधानमंत्री मोदी के आदर्श हैं। मोदी उन्हें गले लगाते हैं। इसलिए वांगचुक के आंदोलन को लेकर मोदी के दिल में कोई तड़प होगी, ऐसा सोचना ही फिजूल है। लेकिन क्या मोदी मंत्रिमंडल के बाकी लोग भी इतने बेरहम और बुजदिल हो चुके हैं? अमानुष और नामर्द हो चुके हैं? यही लोग अन्ना हजारे के अनशन के वक्त दिल्ली की सड़कों पर समर्थन में रैलियां निकाल रहे थे। क्या मोदी मंत्रिमंडल में एक भी मर्द ‘माई का लाल’ ऐसा पैदा नहीं हुआ, जो वांगचुक के समर्थन में अपने मंत्री पद का इस्तीफा फेंक कर ‘जंतर-मंतर’ पर आ सके? खुद मोदी तो ‘मेलोडी’ चॉकलेट का डिब्बा लेकर इटली की खूबसूरत प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिलने चले जाते हैं, लेकिन अपने घर से महज चंद कदमों की दूरी पर बैठे वांगचुक के लिए पानी का एक गिलास तक ले जाने को तैयार नहीं हैं। यह सरासर बेरहमी है, घमंड है। यही घमंड रावण, दुर्योधन, हिटलर और ईदी अमीन का भी था; सिकंदर और नेपोलियन का भी था। आखिर में घमंड मिट्टी में ही मिल गया। औरंगजेब का अहंकार भी इसी मिट्टी में दफन हो गया। इसलिए वांगचुक के आंदोलन के बहाने भाजपा का जो अहंकार आज उफान मार रहा है, उसका भी खात्मा तय है। भाजपा वाले कह रहे हैं कि वांगचुक आम आदमी पार्टी गैंग के सदस्य हैं। जब इसी आम आदमी पार्टी ने ‘रामलीला’ मैदान पर अन्ना हजारे का अनशन ग्यारह दिनों तक चलाया था, तब केजरीवाल की चमचागीरी में भाजपा भी पीछे नहीं थी। यह पूरे देश ने देखा है। उस लिहाज से देखा जाए तो भाजपा भी तब आम आदमी पार्टी गैंग की ही सदस्य थी!
आम आदमी पार्टी का मतलब
‘अल-कायदा’ नहीं है। वांगचुक ने जब से लद्दाख में घुसपैठ कर चुकी चीनी सेना का मुद्दा उठाया है, तब से वह भाजपा की नजरों में देशद्रोही हो गए हैं। भारत सरकार ने वांगचुक को जो ‘पद्म’ पुरस्कार देकर सम्मानित किया था, वह उनके द्वारा पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बेमिसाल योगदान की वजह से था। हिमालय के बेहद ठंडे और दुर्गम इलाकों में देश की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहनेवाले भारतीय जवानों के लिए सोनम वांगचुक ने सौर ऊर्जा से चलने वाले ‘इन्सुलेटेड तंबू’ (टेंट) तैयार किए। बाहर का तापमान चाहे ‘-१४ डिग्री’ क्यों न हो, इन तंबुओं के भीतर का तापमान ‘+१५ डिग्री’ तक बना रहता है। इस आविष्कार की बदौलत जवानों को बर्फीली हवाओं और कड़ाके की ठंड से बहुत बड़ी राहत मिली है। सोनम वांगचुक के काम का लोहा पूरी दुनिया ने माना है और वैश्विक स्तर पर उन्हें सराहा गया है। इस सम्मान का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि वह किस राजनीतिक ‘गैंग’ के सदस्य हैं। सोनम वांगचुक ने आज अपनी जान दांव पर लगाई है, तो सिर्फ इस देश की युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए। देखा जाए तो भारत की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाएं महज एक तमाशा बनकर रह गई हैं। अयोध्या के राम मंदिर में जिस तरह भाजपा के चोर घुसे, ठीक वैसे ही राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के सिस्टम में भी इनके चोर घुस गए और पेपर लीक कराकर हाहाकार मचा दिया। यह देश की बुनियाद को उखाड़ फेंकने की एक सोची-समझी साजिश है। सोनम वांगचुक लद्दाख के हिमालय से दिल्ली आए और उन्होंने देश को बचाने की आवाज बुलंद की। देश को बचाने की इस लड़ाई को जो लोग ‘रोड़ा’ समझते हैं, असल में वही इस देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लद्दाख की जमीनों पर कब्जा करके वहां के आदिवासियों की जिंदगी को तबाह करना, उन जमीनों को अडानी के हवाले करके वहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योग खड़े करना, यह सरासर लूट है। वांगचुक ने जब इस लूट के खिलाफ आवाज उठाई, तो वह मोदी की आंखों में खटकने लगे। आज के आजाद भारत में अपने हक के लिए लड़ना एक गुनाह बन चुका है। वांगचुक की यह लड़ाई हम सबकी लड़ाई है; मनोज तिवारी जैसों को इसकी अहमियत कभी समझ नहीं आएगी!
