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ट्रंप का दावा…ईवीएम में लग सकती है सेंध!.. चुनावी नतीजों से की जा सकती है छेड़छाड़

एजेंसी / वॉशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईवीएम में सेंध लग सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया समेत कुछ विदेशी ताकतें और गैर सरकारी समूह साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों से छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका के चुनावी सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अमेरिकी चुनाव सिस्टम कितना सुरक्षित है और उसमें सुरक्षा के कौन-कौन से इंतजाम हैं।
अमेरिका में वोटर फ्रॉड की पूरी आशंका
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चुनाव किसी एक केंद्रीय संस्था के बजाय १० हजार से ज्यादा अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में कराए जाते हैं। हर राज्य अपने नियमों के मुताबिक, चुनाव कराता है और कई मामलों में स्थानीय प्रशासन भी नियम तय करता है। अमेरिकी संविधान राज्यों को चुनाव कराने का अधिकार देता है। कांग्रेस कुछ नियम बना सकती है, लेकिन चुनाव की पूरी जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की होती है। यही वजह है कि पूरे देश में एक जैसा चुनाव सिस्टम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में वोटर प्रâॉड की घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम सामने आते हैं और ज्यादातर पकड़े भी जाते हैं। एक से ज्यादा बार वोट डालना, किसी दूसरे के नाम पर मतदान करना, बैलेट से छेड़छाड़ करना या गलत जानकारी देकर वोट डालना गंभीर अपराध माना जाता है। इन मामलों में भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। मतदान के दौरान कई राज्यों में पहचान पत्र मांगा जाता है, जबकि डाक से होने वाले मतदान में हस्ताक्षर का मिलान, गवाह या नोटरी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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