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फडणवीस ने शिंदे को दिया फिर झटका!..मुफ्त साड़ी योजना पर लगाया ब्रेक… अब तक ८ योजनाएं हो चुकी हैं बंद

फिरोज खान / मुंबई

महायुति सरकार जनता को लुभाने और लालच देकर फंसाने के लिए बिना सोचे-समझे योजनाओं की घोषणा कर देती है। नतीजा यह हो रहा है कि योजनाएं चंद दिनों में ही दम तोड़ रही हैं। योजनाएं बंद करने के पीछे सरकारी तिजोरी की तंगी बताई जा रही है। वहीं सूत्र बताते हैं कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा शुरू की गई योजनाओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा जानबूझकर ब्रेक लगाकर शिंदे को झटके पर झटका दिया जा रहा है।
अब तक शिंदे द्वारा जारी की गई ८ योजनाओं पर फडणवीस ने ब्रेक लगाया है। अब फडणवीस सरकार ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की एक और लोकलुभावन योजना पर ब्रेक लगाया है। राज्य के २५ लाख अंत्योदय परिवारों को हर दिवाली मुफ्त साड़ी देनेवाली योजना को आर्थिक तंगी के कारण बंद कर दिया गया है। कौशल्य, रोजगार और वस्त्रोद्योग विभाग ने बुधवार को इस संबंध में शासन का निर्णय जारी किया। बता दें कि शिंदे की यह कोई पहली योजना नहीं है, जिसे बंद किया गया है। इससे पहले भी ८ योजनाओं को गटर में डाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि फडणवीस के इस तरह के पैâसलों से दोनों के बीच काफी मनमुटाव भी चल रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले शिंदे सरकार ने यह योजना शुरू की थी। इसके तहत राज्य के अंत्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों को दिवाली में वस्त्रोद्योग विभाग के जरिए १ मुफ्त साड़ी दी जानी थी।
महिलाओं के साथ धोखा
शिंदे सरकार की इस योजना को ‘लाडली बहन की साड़ी’ कहा जाता था। अब इसे बंद किए जाने के बाद विपक्ष इसे महिलाओं के साथ धोखा बताकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष का कहना है कि फडणवीस सरकार ने शिंदे सरकार की ८ बड़ी योजनाएं बंद कर दी हैं। इनमें आनंदा शिधा योजना, मुख्यमंत्री मेरा विद्यालय, सुंदर विद्यालय योजना, एक रुपए में फसल बीमा योजना, स्वच्छता मॉनिटर योजना, एक राज्य, एक गणवेश योजना, लाडला भाई अपरेंटिसशिप योजना, योजनादूत योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना शामिल हैं।
फंड की कमी का हवाला
शिंदे ने बजट पर विचार किए बिना गरीब परिवारों को त्योहार मनाने में मदद और साथ ही राज्य के हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने का हवाला देकर योजना शुरू की थी। इस योजना के लिए सरकार ने २०२५ तक के लिए कुल ९०० करोड़ रुपए का बजट रखा था। हर साल २५ लाख साड़ियों के लिए १०० करोड़ खर्च होने थे। अब यह योजना यह कहकर बंद कर दी गई कि राज्य पर अभी कई योजनाओं का आर्थिक बोझ है। लाडली बहन योजना, प्रस्तावित नई योजनाएं और अन्य दायित्वों को देखते हुए हर साल १०० करोड़ की यह अतिरिक्त योजना आगे चलाना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि कई योजनाओं के कारण खजाने पर ३५,००० से ४०,००० करोड़ का बोझ है। इसी वजह से फंड की कमी से अन्य योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

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