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मुंबई से अपहृत ४ साल की बच्ची बनारस में मिली …मराठी बोल रही थी और लग गया पता

सामना संवाददाता / मुंबई
मई में मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस इलाके से अपहृत चार साल की बच्ची को आखिरकार छह महीने की काफी कोशिशों के बाद पुलिस ने ढूंढ निकाला है। सीसीटीवी फुटेज की मदद से मुंबई से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक पहुंची पुलिस शुरुआत में नाकाम रही। हालांकि, मराठी भाषा की मदद से आखिरकार बच्ची का पता लगाने में कामयाबी मिली। मुंबई पुलिस को सूचना मिली कि बनारस में ४ साल की बच्ची अपने माता पिता को ढूंढ रही है और वह मराठी भाषा में बोल रही है। इस तरह की जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस की एक टीम बनारस पहुंची और बच्ची को सुरक्षित पाया।
मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से सोलापुर की रहनेवाली ४ साल की बच्ची मई महीने में अपने माता-पिता के साथ मुंबई आई थी। २० मई को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस इलाके से एक युवक ने उसका अपहरण कर लिया। इस संबंध में माता रमाबाई आंबेडकर मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस उपायुक्त प्रवीण मुंडे के नेतृत्व में चार पुलिस टीमें गठित की गईं। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि बच्ची का अपहरण करनेवाला युवक उसे लोकमान्य तिलक टर्मिनस ले गया और वहां से उसने बनारस के लिए ट्रेन पकड़ी। ९ नवंबर को उप-निरीक्षक सूरज देवरे और उप-निरीक्षक रामप्रसाद चंदवाड़े की एक विशेष टीम को वरिष्ठ निरीक्षक योगेश साबले और वरिष्ठ निरीक्षक श्रीकांत अदाते के मार्गदर्शन में फिर से वाराणसी भेजा गया। इस बार पुलिस ने वाराणसी में मीडिया और संगठनों की मदद ली। अपहृत बच्ची की जानकारी और तस्वीरें मीडिया को भेजी गईं। इस बीच वहां के एक स्थानीय पत्रकार ने पुलिस को एक मराठी भाषी लड़की के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह लड़की वाराणसी के काशी अनाथालय में है। जब पुलिस आश्रम पहुंची, तो पता चला कि वह अपहृत बच्ची ही है। पुलिस के मुताबिक, बनारस में एक महिला को लड़की सड़क पर रोते हुए दिखाई दी थी। महिला ने बच्ची को स्थानीय पुलिस के पास ले गई और बाद में पुलिस ने उसे इस आश्रम में रखा था। आरोपी ने बच्ची का अपहरण क्यों किया था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है।

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