उमेश गुप्ता/वाराणसी
मानसून की दस्तक के बाद वाराणसी में पिछले कुछ दिनों से हल्की बारिश का दौर शुरू हो गया था। कभी तेज तो कभी हल्की बारिश हो रही थी। हालांकि बीच-बीच में तीखी धूप परेशान कर रही थी। इससे उमस और गर्मी का आलम था। ऐसे में लोगों को झमाझम बारिश का इंतजार था। सोमवार की शाम झमाझम बारिश हुई। करीब दो से तीन घंटे तक तेज बारिश हुई। जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिल लेकिन भारी जलभराव ने मुश्किलें भी बढ़ा दीं। सोमवार को 86.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो पिछले 33 साल में दूसरी सबसे ज्यादा है। इससे पहले 1993 में इतनी बारिश हुई थी।
शाम के समय करीब दो घंटे तेज मूसलाधार बारिश से शहर के कई इलाकों में पानी भर गया। चौकाघाट, रथयात्रा, संकटमोचन, लहरतारा, महमूरगंज,रविंद्रपुरी,कबीरचौरा जैसे इलाकों में सड़कों और घरों में पानी घुस गया। दुकानों में भी पानी भरने से नुकसान हुआ। दोपहिया वाहन बंद हो गए और लोग उन्हें खींचकर मैकेनिक के पास ले जाते दिखे। कुछ जगहों पर कारों को धक्का देना पड़ा।
लोगों का कहना है कि नगर निगम और जलकल विभाग ने नालों और सीवर की सफाई ठीक से नहीं की थी, जिसकी वजह से जलभराव की समस्या आई। विश्वनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। रवींद्रपुरी में नाले का काम अधूरा होने से तीन घंटे तक पानी जमा रहा।
गोदौलिया और गिरजाघर जैसे इलाकों में रोप-वे प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, जिससे कीचड़ और जलभराव की समस्या हो गई है। गिरजाघर में पानी भरने से लोग परेशान रहे और दुकानदारों ने भी समय से पहले दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं।
