सामना संवाददाता / मुंबई
उरण में भाजपा विधायक के करीबी बिल्डर द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाकर बनाई गई अनधिकृत इमारत के कारण १०८ परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। यानी बिल्डर ने उनके साथ विश्वासघात किया है। उरण के चांजे गांव में चिंतामणि के नाम पर बनी अनधिकृत इमारत के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट ने कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इसके अनुसार सिडको की टीम कार्रवाई करने यहां आई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, लेकिन यह रोक सिर्फ आठ सप्ताह के लिए होने से आम परिवारों पर कार्रवाई की तलवार जस की तस बनी हुई है।
चांजे गांव में अनधिकृत इमारतों का साम्राज्य खड़ा करने वाला बिल्डर भाजपा विधायक का करीबी है और भाजपा पदाधिकारी व पूर्व महापौर का बेटा है। अपने पद का दुरुपयोग करते हुए चांजे ग्राम पंचायत की सीमा में सर्वे क्रमांक ७१/२-ए, बी की २० गुंठा जमीन पर चार-चार मंजिला इमारतें खड़ी कर ली हैं। वर्ष २०१४ में निर्मित इमारत के १०८ फ्लैट आम लोगों ने विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेकर किस्तों पर खरीदे हैं। बिल्डर ने इन अनधिकृत फ्लैटों को ग्राहकों को थोपने के लिए फर्जी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया है इसलिए कई परिवारों ने यह सोचकर यहां घर ले लिए हैं कि यह इमारत अधिकृत है। हाई कोर्ट द्वारा चिंतामणि की चारों अवैध इमारतों को गिराने के आदेश दिए जाने के बाद शुक्रवार को सिडको की टीम पुलिस एस्कॉर्ट और मशीनरी के साथ इमारत को गिराने के लिए पहुंची। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई के दौरान आठ सप्ताह की रोक दी है इसलिए चिंतामणि के १०८ परिवारों को फिलहाल बेघर होने से बचा लिया गया है।
सड़क रोकी और गुप्त योजना फूटी
बिल्डर ने सत्ता का इस्तेमाल करते हुए इन इमारतों का निर्माण करने के लिए पड़ोसी निवासियों के घरों और कुएं तक जाने वाले आवासीय मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। उसके बाद सेवानिवृत्त नौसेना कर्मचारी मीनानाथ पाटील और निजी व्यवसायी विजय जाधव ने इस मामले में ग्राम पंचायत, उरण पंचायत समिति, सिडको को शिकायत की थी और न्याय की मांग की थी, लेकिन सत्ता पक्ष के पक्षधर अधिकारियों ने आम लोगों को न्याय दिलाने का साहस नहीं दिखाया। नतीजतन, दोनों ने न्याय के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसके बाद बिल्डरों की गुप्त योजना का पर्दाफाश हुआ।
