हैंकॉक ब्रिज का कार्य अधर में लटका हुआ है। २०१८ में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। इस वजह से जनता में आक्रोश है। मझगांव निवासी मनपा से नाराज हैं। उनका कहना है कि इस ब्रिज का काम जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए। हैंकॉक ब्रिज लगभग एक दशक से योजना में है। इस ब्रिज का निर्माण कार्य आंशिक ही हुआ है और अधिकारी आशावादी हैं कि अगले वर्ष तक कार्य पूरा हो जाएगा। हालांकि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। हैंकॉक ब्रिज की लागत ९० करोड़ आंकी गई है।
मनपा के एक अधिकारी ने बताया कि इस पुल के बचे हुए सिविल कार्यों को पूरा करने में मुश्किल से चार महीने लगेंगे। असली समस्या यह है कि हैंकॉक ब्रिज के मामले में अदालत द्वारा कार्य पर रोक लगी हुई है। इस वजह से देरी हो सकती है। मूल हैंकॉक ब्रिज जो करीब १०० साल पुराना था, २०१८ में ढहा दिया गया था, क्योंकि संरचनात्मक ऑडिट में इसकी संरचना खतरनाक पाई गई थी। यह पुल आंशिक रूप से २०२४ में खोला गया था। हालांकि, कई व्यावसायिक और आवासीय इमारतें इसके नए ढांचे की जद में आ रही थीं, जिनके निवासियों ने अदालत का रुख किया और परियोजना पर रोक लगवा दी, जिससे पूरा पुल खोला नहीं जा सका।
क्षेत्र में हमेशा बनी रहती है ट्रैफिक समस्या
पूर्व नगरसेवक और विधायक रईस शेख ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर पूछा था कि मझगांव स्थित हैंकॉक ब्रिज परियोजना अब तक पूरी क्यों नहीं हुई? पुनर्निर्मित पुल के चार में से केवल दो लेन अगस्त २०२२ में खोली गई थी। यह वही हिस्सा है, जो सेंट्रल रेलवे की मुख्य लाइन की पटरियों के ऊपर से होकर गुजरता है और सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन के पास है। हालांकि, शेष दो लेन जिनका वादा किया गया था, अब तक अस्तित्व में नहीं आई हैं। अभी केवल दो लेन चालू होने के कारण इस क्षेत्र में हमेशा ट्रैफिक की भीड़ रहती है। खासकर स्कूल के समय में, क्योंकि इलाके में कई स्कूल स्थित हैं।
हैंकॉक ब्रिज का मामला अधिक जटिल है, क्योंकि इस पर अदालती रोक है। हम इस रोक को हटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अगर हम इस साल उसमें सफल होते हैं तो यह पुल भी अगले वर्ष तक तैयार हो सकता है।
– मनपा अधिकारी
