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महायुति पर भड़के एनएचएम के कर्मचारी…हाई कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम करने वाले हजारों संविदा कर्मचारियों ने आखिरकार सोमवार को सरकार की उदासीनता के खिलाफ पूरे राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पिछले पंद्रह से बीस वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ रहे ये कर्मचारी आज भी संविदा के आधार पर काम कर रहे हैं और सरकार की अनदेखी के कारण उनकी जायज मांगें धरी की धरी रह गई हैं। १० साल सेवा दे चुके कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखने के पैâसले के १५ महीने बाद भी सरकार इसे लागू नहीं कर रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एकीकरण समिति ने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में तुरंत पैâसला नहीं लिया गया तो विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एकीकरण समिति के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर ठाणे जिला कलेक्ट्रेट और राज्यभर के अन्य जिला कलेक्ट्रेट के सामने विरोध प्रदर्शन किया। समिति के राज्य समन्वयक मनीष खैरनार ने मांग की कि संभाजीनगर उच्च न्यायालय के पैâसले को लागू किया जाना चाहिए और १४ मार्च २०२४ के सरकारी फैसले के अनुसार कर्मचारियों का समायोजन तुरंत किया जाना चाहिए, एनएचएम कर्मचारियों के मानदेय में १० प्रतिशत की वृद्धि की जानी चाहिए और नियमित कर्मचारियों की तरह ५ प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू की जानी चाहिए, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एकमुश्त स्थानांतरण नीति लागू की जानी चाहिए और सभी कर्मचारियों के लिए बीमा और भविष्य निधि योजना लागू की जानी चाहिए। हालांकि, सोमवार के विरोध ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन कर्मचारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, वे अपनी लड़ाई नहीं रोकेंगे।
अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं
इस संबंध में संगठन पिछले छह महीने से स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर और दोनों स्वास्थ्य सचिवों के साथ समायोजन और अन्य न्याय की मांग और कठिनाइयों के बारे में अपना पक्ष रखने के लिए बैठकें कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में महाराष्ट्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लगभग ३३ हजार कर्मचारी हैं, जिनमें से १३ हजार कर्मचारी दस साल से अधिक समय तक सेवा कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सेवा में शामिल करने के पैâसले के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया है।

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