सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की महायुति सरकार लगातार दावा करती है कि यह सरकार मेहनतकशों और किसानों की है, लेकिन मुंबई से सटे जव्हार के धीवंडा गांव में रहने वाले आदिवासियों को खेती करने के लिए हर दिन टायर-ट्यूब में वाघ नदी से होकर जाना पड़ता है। यानी जब तक किसान नदी में नहीं बहेंगे, तब तक राज्य की महायुति सरकार नहीं जागेगी।
किसानों को मानसून के मौसम में अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। जव्हार तालुका के धीवंडा गांव में स्थित वाघ नदी इस समय उफान पर है। कृषि उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है और उन सभी के खेत मोखाडा तालुका में नदी के उस पार हैं। वर्तमान में चूंकि कृषि कार्य चल रहा है इसलिए किसानों को हर दिन वहां जाना पड़ता है। चूंकि नदी पर कोई पुल नहीं है और कोई अन्य रास्ता उपलब्ध नहीं है इसलिए आदिवासी टायर ट्यूब पर खेतों में जाने के लिए मजबूर हैं। वाघ नदी का तल बहुत चौड़ा है और नाव उपलब्ध नहीं हैं इसलिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर हर दिन टायर ट्यूब पर खेतों में जाना पड़ता है। आदिवासी पिछले कई वर्षों से वाघ नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। पिछले साल इसी नदी को पार करते समय किसान विष्णु फुकाने बह गए थे। हालांकि, सरकार अभी तक नहीं जागी है।
