प्रभुनाथ शुक्ल भदोही
भगवान आ उनकर भक्त एक दूसरा के पूरक हवें। मतलब साफ बा कि ना त भगवान के बिना भक्त के अस्तित्व हो सकेला, ना भगवान अपना भक्त के बिना। हमनी के शास्त्र में भक्ति के नौ गो रूप के वर्णन भइल बा बाकि बदलत समय में ई नब्बे से अधिका रूप ले लिहले बा। आज के समय में एह भक्ति के सबसे लोकप्रिय रूप सेल्फी भक्त आ ओकर भक्ति बा। भगवान के दरबार में पहुंचते ही सेल्फी भक्ति के भूत कपार पर चढ़ जाला। इ भक्ति हमनी के देश में बहुत लोकप्रिय बा। भगवान सेल्फी भक्त से परेशान बाड़े। ऊ लाख बेर अपना के बचावे के कोशिश करेला बाकि सेल्फी भक्त ओकरा के ना छोड़ेला।
वैसे हमनी के देश में प्रेमिका भक्ति बहुत लोकप्रिय बा। जइसे लोग कपड़ा बदलेला ओसही आज के समय में प्रेमिका भक्त आपन प्रेमिका बदलेले। प्रेमी-प्रेमिका कम बा लेकिन प्रेमिका एह भक्ति के सच्चा पूजा करेली। प्रेमिका अइसन भक्तन के खोजेली जेकरा लगे जेब के पइसा ढेर होखे। प्रेमिका लोग एह तरह के भक्ति के जल्दी स्वीकार करेला। जबकि पत्नी भक्ति के हालत खराब बा। काहे कि मोबाइल भक्ति ओह लोग का बीच के देवाल बन गइल बा। ई नियम दुनु पर लागू होला। पति-पत्नी एक संगे रहला के बावजूद अलग-अलग बाड़े। दुनु अलग-अलग मोबाइल के भक्ति में डूबल लउकत बाड़े।
अब तक हमनी के धार्मिक शास्त्र में भक्ति के मात्र नौ रूप के वर्णन भईल बा लेकिन समय के संगे संशोधन जरूरी हो गईल बा। धार्मिक लोग सभा बोला के भक्ति के नौ रूप में एक रूप अउरी जोड़े के अनुमति देस। जबसे मोबाइल के दौर शुरू भइल बा तब से भक्ति के एगो नया रूप सामने आइल बा। ओह नौवीं भक्ति के नाम ह सेल्फी भक्ति ह। देश में आजकल इ भक्ति बहुत लोकप्रिय बा। आसमान से जमीन तक जहां जाइब सेल्फी भक्ति मिली। मंदिर, समुद्र, नदी, झरना, कार्यस्थल, बाढ़, सूखा, हवाई यात्रा, रेल यात्रा, पिकनिक स्थल पर ई भक्ति मौजूद बा। पत्नी, संतान-परिवार सब पीछे रह जाला, लेकिन इ भक्ति ना छोड़ेला।
