-खाद्य गुणवत्ता खराब, सरकार पर उठ रहे सवाल
-मंत्री ने कहा लाइसेंस करेंगे रद्द
-हर ६ महीने में गोदामों की होगी जांच
सामना संवाददाता / मुंबई
पिछले कुछ वर्षों से देशभर में ई-कॉमर्स कंपनियों की बाढ़ आ गई है, जो खाने-पीने से लेकर हर तरह की वस्तुएं ऑनलाइन उपलब्ध करवा रही हैं। लेकिन खाद्य उत्पादों की ऑनलाइन आपूर्ति करने वाली इन कंपनियों के गोदामों में अत्यधिक गंदगी पाई जा रही है। कई ऐसे मामले उजागर हो रहे हैं। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार का ई कामर्स कंपनियों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा गया है। मंगलवार को विधान परिषद में भी यह मुद्दा गुंजा। जिसके बाद सरकार ने खराब व निर्मन गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री बेचने वाले ई कामर्स कमापनियों के लाइसेंस रद्द करने की घोषणा की। खाद्य व औषधि विभाग के मंत्री नरहरि झिरवल ने कहा कि इन कंपनियों के गोदामों की जांच के बाद ही उन्हें व्यावसायिक अनुमति दी जाएगी। इससे ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी।
विधान परिषद में सदस्य संदीप जोशी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मांग की कि इन ऑनलाइन कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाई जाए। सदन में जवाब देते हुए मंत्री नरहरी झिरवाल ने जानकारी दी कि निरीक्षण के लिए २१०० लोगों की भर्ती कर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अलावा, खाद्य उत्पादों और स्कूल पोषण आहार की गुणवत्ता जांचने के लिए २७ मोबाइल लैब शुरू की जाएंगी। साथ ही, ऐसी शिकायतों के लिए २४ घंटे काम करने वाली टोल-प्रâी हेल्पलाइन शुरू की जाएगी।
बता दें जेप्टो के गोदाम में गंदगी, खराब उत्पाद मिले हैं।खाद्य व औषधि प्रशासन द्वारा की गई जांच में जेप्टो के मुंबई स्थित गोदाम और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कई बातें सामने आर्इं जैसे गंदगी, असुरक्षित तापमान पर रखा गया सामान और एक्सपायरी डेट के बाद भी मौजूद खाद्य उत्पाद। इससे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के स्वास्थ्य को खतरा पहुंच रहा है।
दो लाइसेंस निलंबित, ३४ को नोटिस
जेप्टो, स्विगी जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के गोदामों में कुल ४३ निरीक्षण किए गए। खामियां मिलने के बाद ५ संस्थाओं को कारोबार बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि ४२ में से ३४ को सुधारात्मक नोटिस जारी किए गए हैं, ऐसा झिरवाळ ने बताया।
