मुख्यपृष्ठस्तंभसम-सामयिक : कहां ले जाएगी परमाणु हथियारों की नई होड़?

सम-सामयिक : कहां ले जाएगी परमाणु हथियारों की नई होड़?

संजय श्रीवास्तव

डस्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट, सीपरी की २०२५ की ताजा रिपोर्ट ने नए परमाणु हथियारों और उनकी तैनाती, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर तथा स्पेस टेक्नोलॉजी से हथियारों के अलावा उसके प्रक्षेपण प्लेटफार्मों का जुड़ाव और विकास बताता है कि परमाणु युद्ध के खतरे आसन्न हैं, जबकि परमाणु युद्ध की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था बेहद कमजोर हो चुकी है।
हालांकि ईरान-इजरायल जंग के साथ इस आशंका ने फिर से सिर उठाया है कि बहुत से देश चोरी छिपे परमाणु शक्ति हासिल करने की ओर थे, वे अब सत्वर इस ओर बढेंगे। जो शांतिपूर्ण कार्यों के नाम पर खुलेआम परमाणु कार्यक्रम चला रहे थे और इसके बहाने लुके छिपे हथियार बनाना चाहते थे, वे अब शीघ्रातिशीघ्र हथियार बनाकर, ‘न्यूक्लियर पावर्ड नेशन’ की हैसियत हासिल कर अपने को सुरक्षित करना चाहेंगे। उनकी सोच होगी, यदि ईरान ‘परमाणु शक्ति संपन्न हो चुका होता, तो संभवत: उसके साथ ऐसा नहीं होता’। इजरायल और अमेरिका को अपने किए पर पुनर्विचार करना पड़ता; क्योंकि दोनों उसकी मिसाइलों की जद में हैं। ये देश इस ताकत को हासिल कर दुश्मनों का आसान शिकार होने से बचने की कोशिश करेंगे तथा इसके चलते समूचे संसार में परमाणु होड़ बढ़ेगी। ईरान परमाणु बम बनाकर सबसे पहले इजरायल पर ही गिराएगा इस आशंका की आड़ में इजरायल ने उस पर हमला किया। ईरान परमाणु बम बनाने की ओर अग्रसर था या नहीं, इस कोशिश में था तो कामयाबी के कितने करीब, यह न तो अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को पता था न अमेरिका को, न ही इजरायल की खुफिया एजेंसी को। पर इस बात की कोई गारंटी नहीं कि अब वह इसका प्रयास नहीं करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के समय प्रधानमंत्री ने ललकारा था, भारत,पाकिस्तान के परमाणु शक्ति संपन्न देश होने की परवाह नहीं करेगा, वह हर बेजा हरकत का माकूल और मुंहतोड़ जवाब देगा। रूस और युक्रेन के युद्ध की शुरुआत से लेकर अभी तक आए दिन युद्ध के दौरान परमाणु खतरे की बात होती रहती है, कभी हमले की जद में आने से परमाणु संयंत्रों से रिसाव की तो कभी रूस द्वारा परमाणु हमले की। बीते दिनों अमेरिका ने सात बी२ स्टील्थ बॉम्बर विमानों के जरिए १३,००० किलो से ज्यादा वजनवाले १४ बंकर बस्टर बमों को ईरान के दुर्भेद्य परमाणु ठिकानों पर बरसाकर दावा किया कि हमने सब नेस्तनाबूद कर दिया। ईरान का दावा कि भले ही प्लेनेट लैब्स, पीबीसी और माक्सार टेक्नोलॉजीज के सैटेलाइटों से ली गई तस्वीरों में जहां भूमिगत सेंट्रीफ्यूज हॉल है, उसके ऊपर पांच मीटर के गड्ढे दिखें, लेकिन हमने पहले ही तीनों ठिकानों को खालीकर, संवर्धित यूरेनियम हटा लिया था। ईरानी परमाणु ठिकानों के वाकई कितना नुकसान पहुंचा है, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी भी नहीं बता रही। कुछ विशेषज्ञ दावा करते हैं कि फोर्दो में जमीन के नीचे यदि पर्याप्त नुकसान नहीं हुआ है तो जितना उसके पास संवर्धित यूरेनियम है और जिस श्रेणी का है, उससे रूस, चीन की मदद से सात-आठ नाभिकीय बम बनाए जा सकते हैं। कुछ का कहना है कि वे बहुत ताकतवर नहीं होंगे। ठीक है, पर ईरान इससे सीमित क्षेत्र में रेडियोधर्मी पदार्थ फैलाने, विकिरण से प्रभावित करनेवाला डर्टी बम तो बना ही सकता है। ये भी कम चिंता का विषय नहीं।
खतरनाक बदलाव
कुल सबब यह कि नाभिकीय युद्ध की पूर्व पीठिका वर्तमान में जारी रूस, यूक्रेन युद्ध ने रच दी थी। हालिया ईरान इजरायल जंग जिसमें बाद में अमेरिका भी कूद पड़ा, उसमें दूसरे खिलाड़ी कूदे तो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल आशंकित हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट, सिपरी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में परमाणु हथियारों की एक खतरनाक होड़ शुरू हो गई है। एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी मौजूदा परमाणु ताकत को पूरी तरह से बदलकर इसे और भी अधिक विध्वंसक तथा जन संहारक बना रही है। ऐसे में संसार के नाभिकीय युद्ध की ओर बढ़ने के संकेत पहले से अधिक साफ हैं। यह गहन चर्चा और चिंता का विषय है। खास तौरपर एक परमाणु संपन्न होने और दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों से घिरे होने के चलते इन परिस्थितियों में हमारे बचाव, आक्रमण अथवा असंतुलन की नीति, रणनीति वैâसी हो? शेष विश्व को इस बढ़ती नाभिकीय आक्रामकता का मुकाबला किस प्रकार की कूटनीति से करना चाहिए कि यह मानवता के लिए संकट न बने और नाभिकीय हथियारों की होड़ हमेशा के लिए थमे। सिपरी ने बताया कि पिछले बरस से भारत सहित सभी नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या में इजाफा करना, उन्हें अधिक घातक, आधुनिक तथा बेहतर बनाने का काम तेज कर दिया है। उन्हें ले जानेवाली प्रणालियां यथा मिसाइल सिस्टम, रॉकेट, लड़ाकू जहाजों को वे उनके अनुरूप तेजी से विकसित कर रहे हैं। सिपरी बताता है कि चीन के पास अब ६०० से अधिक परमाणु हथियार हैं, जिनको २०३५ तक वह १,५०० तक पहुंचने वाला है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार हैं)

अन्य समाचार