-भ्रष्ट अधिकारियों पर करो कड़ी कार्रवाई
-शिवसेना ने सदन में की जोरदार मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
आम आदमी की सवारी के रूप में मशहूर राज्य की एसटी सर्विस ‘लालपरी’ भ्रष्टाचार के दौर से गुजर रही है। इसका यह हाल अधिकारियों ने किया है। अधिकारियों के इस सक्रिय सिंडिकेट में सरकार को हस्तक्षेप करते हुए सख्ती दिखानी चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भले ही २,००० करोड़ रुपए की एसटी बसों की खरीद का ठेका रद्द कर दिया हो, लेकिन इस घोटाले के सूत्रधार अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जोरदार मांग कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सदन में की।
एसटी को अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के गड्ढे में धकेला!
महाराष्ट्र में एसटी (लालपरी) भारी भ्रष्टाचार के दौर से गुजर रही है। इस भ्रष्टाचार के चलते एसटी का घाटा बढ़कर अब १०,९६२ करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसलिए एसटी को गड्ढे में धकेलते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इस तरह की जोरदार मांग शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक एड. अनिल परब ने विधान परिषद सदन में परिवहन मंत्री से की।
अनिल परब की इस मांग पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि एसटी के कायाकल्प के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। विधान परिषद में कल एसटी महामंडल की आर्थिक दुर्दशा पर आधे घंटे तक चर्चा हुई। इस दौरान शिवसेना विधायक एड. अनिल परब ने एसटी में फैले भ्रष्टाचार को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि एसटी महाराष्ट्र की जीवनरेखा है, जो आम लोगों के लिए बेहद अहम है। इसमें अधिकारियों के स्तर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, वहीं कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। अगर सरकार एसटी को घाटे से उबारना चाहती है तो उसे सख्त नीति अपनानी होगी और परिवहन मंत्री को एसटी के अध्यक्ष के तौर पर ठोस प्रयास करने होंगे। इस चर्चा में शशिकांत शिंदे, सदाभाऊ खोत, प्रवीण दरेकर समेत कई अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया।
सरकारी नौकरी का झूठा लालच
परब ने कहा कि एसटी कर्मचारियों को सरकारी सेवा में लेने का झूठा लालच देकर पांच महीने लंबा आंदोलन करवाया गया। सदाभाऊ खोत, गोपीचंद पडलकर और एड. गुणरत्न सदावर्ते ने कर्मचारियों से वादा किया था कि उन्हें सरकारी सेवा में लिया जाएगा, लेकिन अब उन्हें कर्मचारियों से कोई हमदर्दी नहीं है। जब वे विपक्ष में थे, तब वे कर्मचारियों के लिए लड़ते थे, लेकिन अब वे कहां हैं?
ई-बसों की खरीद में भी घोटाला
एसटी महामंडल ने ५,०५० ई-बसें खरीदने का निर्णय लिया था। इसमें शर्त थी कि बसें निर्माता कंपनी से खरीदी जाएं। अगर बसें निर्माता से सीधे खरीदी जातीं, तो कम कीमत में मिलतीं। लेकिन ओलेक्ट्रा कंपनी के लिए बसें खरीदी जा रही हैं। परब ने आरोप लगाया कि ओलेक्ट्रा कंपनी चीन से बसें मंगवाकर सिर्फ अपने स्टिकर लगाती है।
