सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में महायुति सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के प्रति अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। मुंबई हो, बीड हो या कोकण का रायगड सभी क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सुरक्षा का मुद्दा गरमाता जा रहा है। विधानमंडल के मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार का महिलाओं की असुरक्षा को लेकर घेराव किया है। विपक्ष ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष महिलाओं के प्रति अपराध लगभग ३० प्रतिशत अधिक हुआ है, जबकि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने ‘शक्ति’ कानून को अभी तक लागू नहीं किया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि सरकार की आखिर मंशा क्या है?
बीड के मामले को उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि जिले में जनवरी से मई के बीच २०२४ में ६५ दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए थे। इस साल २३ अपराध बढ़कर ८५ अपराध हो गए हैं। पिछले साल छेड़छाड़ के १९७ मामले दर्ज किए गए थे, जो १२ प्रतिशत बढ़कर २०९ हो गए। ये आंकड़े बताते हैं कि नाबालिग लड़कियों के साथ-साथ महिलाओं पर यौन हमलों में भी चिंताजनक वृद्धि हुई है।
रायगड जिले में एक दिन में ६ बलात्कार
वडेट्टीवार ने कहा कि रायगड जिले में एक दिन में छह बलात्कार हुए, राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी? यह कहने की जरूरत नहीं है। मुझे समझ में नहीं आता कि जब महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं तो आप शक्ति अधिनियम क्यों लागू नहीं कर रहे हैं। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि मैं मांग करूंगा कि शक्ति अधिनियम लागू किया जाए और इसी सत्र में इसे लागू किया जाए। हम सरकार से पूछेंगे कि क्या इस राज्य में महिलाएं सुरक्षित हैं।
नाबालिग लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार के ४२ मामले
बीड में निजी कोचिंग क्लास के शिक्षक द्वारा छात्रा से रेप का मामला मानसून सत्र में गरमाया। इस मामले के कारण नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है। बीड में चालू वर्ष में जनवरी से मई २०२५ तक के पांच महीनों में जिले में बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम के तहत ७८ मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से ४२ मामलों में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया गया है, शेष ३६ मामले छेड़छाड़ से संबंधित हैं। चौंकानेवाली बात यह है कि पिछले पांच महीनों में कुल बलात्कार के मामलों में ४९ फीसदी पीड़ित नाबालिग हैं। इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए माता-पिता, शिक्षकों, स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
