सामना संवाददाता / मुंबई
जसलोक हॉस्पिटल ने कैंसर इलाज के क्षेत्र में एक अनोखी मिसाल पेश की है। अस्पताल ने परमाणु चिकित्सा (न्यूक्लियर मेडिसिन) की मदद से मेटास्टैटिक प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे 66 वर्षीय मरीज श्री विनय वैद्य का सफल इलाज किया, जिसे पारंपरिक चिकित्सा ने जवाब दे दिया था और जिसे केवल कुछ महीनों का जीवन बताया गया था। ऐसे समय में जसलोक के डॉक्टरों ने ल्युटेशियम थेरेपी का प्रयोग कर मरीज को नया जीवन दिया।
कई हार्मोनल थेरेपी और कम से कम तीन कीमोथेरेपी के बाद भी मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। कैंसर बोन मैरो तक फैल गया था, जिससे उसके हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट का स्तर काफी गिर चुका था। स्थिति यह थी कि उसे बार-बार खून और प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ रहे थे। डॉक्टरों ने उसे केवल सहायक और दर्द निवारक देखभाल की सलाह दी थी क्योंकि उसके बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।
मगर मरीज ने हार नहीं मानी और जसलोक हॉस्पिटल की शरण ली। डॉ. जेहान धाभर और डॉ. विक्रम लेले की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। मरीज का प्लेटलेट काउंट मात्र 7,000 था, जो सामान्यतः ल्युटेशियम थेरेपी के लिए ज़रूरी न्यूनतम सीमा से बहुत कम है। इसके बावजूद, टीम ने सावधानीपूर्वक ब्लड ट्रांसफ्यूजन और विशेष देखभाल के ज़रिए उसकी स्थिति को स्थिर किया।
