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देवनार में सफाई के बहाने जमीन का सौदा! …मनपा को प्राप्त हुए तीन टेंडर …बिल्डरों के बल्ले-बल्ले

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का देवनार डंपिंग ग्राउंड दशकों से शहर के ठोस कचरे का सबसे बड़ा ठिकाना रहा है। अब मुंबई मनपा ने इस १८५ लाख टन कचरे को हटाने और ११० हेक्टेयर जमीन को साफ कर पुनर्विकसित करने की २,३६८ करोड़ रुपए की योजना शुरू की है। मनपा को इस काम के लिए तीन कंपनियों से टेंडर प्राप्त हुए हैं।
वैसे तो यह एक ‘बायोरिमेडिएशन’ प्रोजेक्ट है, जिसमें हवा, धूप और सूक्ष्मजीवों की मदद से कचरा नष्ट किया जाएगा। दावा है कि तीन वर्षों में जमीन पूरी तरह साफ होकर शहर के लिए उपयोगी बन जाएगी। लेकिन असली सवाल यह है कि यह जमीन आखिर जाएगी किसके हाथ?
रिपोर्ट की मानें तो यह पूरी जमीन धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) को सौंपी जाएगी, जिसे अडानी ग्रुप और महाराष्ट्र सरकार की स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) मिलकर चला रहे हैं। यह गठजोड़ कई नागरिक संगठनों और शहरी योजनाकारों के बीच चिंता का कारण बन गया है।

विकास नहीं, शहरी विस्थापन की शुरूआत
कई संगठनों का कहना है कि मनपा की यह पूरी योजना जनस्वास्थ्य और स्वच्छता से अधिक भूमि पुनर्विकास के नाम पर की जा रही जमीन की सौदेबाजी लगती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस परियोजना को लेकर पहले ही पारदर्शिता पर उंगलियां उठ चुकी हैं, क्या उसे इतनी बड़ी सार्वजनिक जमीन देना जनहित में है? देवनार की सफाई निश्चित ही जरूरी है, लेकिन इसके पीछे अगर जमीन के बाजारू खेल छिपे हैं तो यह ‘विकास’ नहीं, एक नई शहरी विस्थापन गाथा की शुरुआत हो सकती है।

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