मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : मजदूर हैं, मजबूर नहीं

तड़का : मजदूर हैं, मजबूर नहीं

कविता श्रीवास्तव
इंदौर के एक व्यक्ति का कहना है कि उनके घर की कामवाली का परिवार उनसे ज्यादा कमाता है। उन्हें कोई टैक्स भी देना नहीं होता है। उन्हें सरकारी राशन कार्ड पर राशन भी मुक्त मिलता है। उनके पास गांव में सरकारी योजना से मिला हुआ अपना मकान भी है। कामवाली के घर में वह खुद, उसका पति, उसके बेटे-बेटियां सभी कमाते हैं। उनकी कुल मासिक आय १ लाख ३५ हजार से भी अधिक है। यदि इंदौर के इस व्यक्ति के दावे पर गौर किया जाए तो यह केवल एक कामवाली के परिवार की बात नहीं है। यह देखा गया है कि मजदूरी करनेवाले जिस परिवार में पति-पत्नी, बेटे-बेटियां सभी कुछ न कुछ कमाते हैं, उनकी सामूहिक आय कई बार उनके किसी भी मालिक से ज्यादा होती है। यदि सब मिलकर सामूहिक आय से परिवार चलते हैं तो निश्चित रूप से उनकी आय बेहतर होती है। यह भी सच है कि यह उनके परिश्रम का परिणाम है। प्रति व्यक्ति आय कम होने की वजह से वे टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं। इसी तरह कम आय होने की वजह से परिवार के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठाते हैं। इस तरह उनके परिश्रम और कुछ सरकारी योजनाओं के माध्यम से उनका जीवन स्तर सुधरता है और वे मध्यम वर्ग की श्रेणी में खड़े होने का अवसर पाते हैं। उनके परिवार की कुल आय को लेकर कोई टिप्पणी करने की बजाय उनके अतीत को झांककर देखना चाहिए। वर्तमान स्तर तक उनके पहुंचने के लिए उठाए गए उनके कष्ट को समझना चाहिए। उनकी प्रगति पर खुश होना चाहिए। कहा जाता है कोई भी काम छोटा नहीं होता। जिस काम को आमतौर पर छोटा समझा जाता है, उसे करनेवाले के प्रति हीन भावना रखना उचित नहीं है। लोगों के घरों में या अन्य कहीं भी काम करनेवाले मजदूर हमारे घर-परिवार और समाज के बहुत बड़े सहायक होते हैं, यह ध्यान रखना चाहिए। उनका भी अपना घर-परिवार और स्वाभिमान होता है। उन्हें भी आगे बढ़ने के शुभ अवसर मिलने चाहिए। हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि कुछ लोगों का काम अलग है इसलिए वे मजदूर हैं, पर वे मजबूर नहीं है।
कुत्ते की बोली पर गोली
यूपी के बिजनौर में कुत्ते की बोली यानी कुत्ते का भौंकना एक व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसे इतना क्रोध आया कि उसने कुत्ते पर पर गोलियां चला दीं और कुत्ते की मौत हो गई। यह बात चर्चा में आ गई, क्योंकि पशु पर इस तरह गोली चलाना किसी को अच्छा नहीं लगा। पशु निरीह होते हैं और वे प्राय: मनुष्यों पर निर्भर होते हैं। कुत्ता खासतौर पर मनुष्यों के इर्द-गिर्द रहता है और वह कई बार अपने स्वभाव के कारण भौंकता है। उस पर क्रोध जताने के लिए सीधे गोली चला देना क्रोध की अति है। ऐसा स्वभाव ठीक नहीं कहा जा सकता है।

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