सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के हितों के लिए ठाकरे बंधु एक साथ आएंगे… उनके एक इशारे पर लाखों लोग जमा होंगे…नाचते-गाते जीत का जश्न मनाएंगे… और इस जनसैलाब के समक्ष महाराष्ट्रद्रोहियों को आवाज देंगे…सब अद्भुत, अप्रतिम और अविश्वसनीय! इसका वर्णन करने के लिए शब्द भी कम पड़ने लगे। इस तरह का यह भव्य और ऐतिहासिक विजयोत्सव सम्मेलन रहा। वर्ली डोम सभागृह में महाराष्ट्र प्रेम के ये शब्द गगन छूते हुए नजर आए। वर्ली के डोम सभागृह में हुए इस सम्मेलन में भूमिपुत्रों के आनंद में सचमुच उफान था। इस उफान के सामने समुद्र भी छोटा पड़ गया। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने मराठी मन में जो ज्वाला प्रज्वलित की थी, वह आज भी उतनी ही प्रखर और सजीव महसूस हुई।
त्रिभाषा के विरोध में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने हुंकार भरी और उस लड़ाई को जीत लिया। तभी से महाराष्ट्र का माहौल बदलने लगा था। आज पूरे देश ने यह देखा कि यह माहौल कितना बदल चुका है। मराठी एकजुटता के इस विजय समारोह के लिए आनेवाले भूमिपुत्रों की भारी भीड़ ने मुंबई की सड़कों को पूरी तरह भर दिया था। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के नाम का जयघोष करते हुए लोग जत्थों में जिस भी वाहन से हो सका, वर्ली की दिशा में बढ़ते जा रहे थे। वर्ली के डोम सभागार के प्रवेश द्वारों पर भीड़ की लहरें एक के बाद एक टकरा रही थीं। ऐसा लग रहा था मानो ये लहरें पास के समुद्र की लहरों से ही प्रतिस्पर्धा कर रही हों। कार्यक्रम का समय हो जाने के बाद भी भीड़ का सिलसिला थम नहीं रहा था। सभा के लिए पुलिस की ओर से अभूतपूर्व बंदोबस्त किया गया था, लेकिन भीड़ इतनी जबरदस्त थी कि पुलिस को भी भागदौड़ और परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सभागृह खचाखच भर गया था। जब अंदर की सभी सीटें भर गर्इं तो लोग सभागृह की खाली पंक्तियों में खड़े हो गए। इतनी भीड़ थी कि वहां तिल भर जगह नहीं बची। अंत में करीब ११.३० बजे सभागार के दरवाजे बंद कर दिए गए। इसके बाद भी हजारों लोग बाहर रह गए थे। इन सभी लोगों के लिए सभागृह के बाहर बड़ी स्क्रीन पर कार्यक्रम देखने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वहां भी भीड़ बहुत अधिक थी। वर्ली के ‘अस्तित्व बैंड’ ने महाराष्ट्र और मराठी गौरव से जुड़े गीतों की धुनें बजाकर कार्यक्रम के जोश और उत्साह में और इजाफा किया।
पोस्टर और बैनरों ने खींचा ध्यान
सभा में आए मराठी प्रेमियों के हाथों में जो पोस्टर और बैनर थे, उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। लोगों ने अपने हाथों से बनाए हुए सैकड़ों पोस्टरों पर लिखा था कि ‘मुंबई हमारे हक की है, नहीं किसी के बाप की…’, ‘जो मराठी होकर भी चुप हैं, वो परायों से अलग नहीं…’, ‘उठ मराठा, जाग जा…’, ‘ठाकरे हमारे देवता हैं…’ ‘महाराष्ट्र में ब्रांड सिर्फ ठाकरे…’ ऐसे कई पोस्टर लोग खुद के हाथों तैयार करके लाए थे। कई लोगों ने महाराष्ट्र द्रोहियों का विरोध करनेवाली वेशभूषा भी अपनाई थी। पालघर के शिवसैनिकों ने यमराज के रूप में तैयार होकर महाराष्ट्रद्रोहियों को जगह दिखाने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के मुखौटे पहन रखे थे, जो सबके आकर्षण और प्रशंसा का केंद्र बने।
शिवसेनाप्रमुख का ‘वो’ फोटो बना आकर्षण का केंद्र
सभास्थल और सभागृह के अंदर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के फोटो सबका ध्यान खींच रहे थे। एक विशेष बैनर में शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को आशीर्वाद देते हुए दिखाया गया था, जो सभास्थल पर लगाया गया था। हर कोई उस बैनर के सामने रुक रहा था और मन ही मन यह भावना प्रकट कर रहा था कि यह दृश्य हमेशा ऐसा ही बना रहे।
राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति
यह विजयोत्सव सभा किसी एक पार्टी का कार्यक्रम नहीं था। यह पहले से ही स्पष्ट कर दिया गया था कि वहां कोई झंडा नहीं होगा और केवल मराठी ही एकमात्र एजेंडा रहेगा। इसी कारण महाराष्ट्र के विभिन्न दलों के नेता इस अवसर पर उपस्थित थे। इस मौके पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, विधायक जीतेंद्र आव्हाड, शेतकरी कामगार पार्टी के जयंत पाटील, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कॉ. प्रकाश रेड्डी, कॉ. अजीत नवले, राष्ट्रीय समाज पार्टी के नेता महादेव जानकर और सांसद भालचंद्र मुणगेकर उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में इन सभी नेताओं को मंच पर आमंत्रित किया गया। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे, शिवसेना सांसद संजय राऊत और मनसे नेता अमित ठाकरे को भी मंच पर बुलाया गया। जब आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे मंच पर आए तो सुप्रिया सुले ने दोनों का हाथ पकड़कर मंच के बीच में खड़े होने का आग्रह किया। इसके बाद वे दोनों अपने-अपने चाचाओं के पास जाकर खड़े हो गए। महादेव जानकर ने मंच पर मौजूद सभी नेताओं को पेड़े खिलाकर इस एकजुटता की खुशी जाहिर की। अजीत भुरे ने प्रभावशाली और प्रवाही शैली में कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने प्रबोधनकार ठाकरे से लेकर हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख श्री. बालासाहेब ठाकरे तक मराठी अस्मिता के लिए किए गए संघर्ष को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
जय महाराष्ट्र… जय महाराष्ट्र…
बेस्ट की बसों, लोकल ट्रेनों और मुंबई के हर चौराहे पर कल सिर्फ सभा की ही चर्चा थी। शिवसेना और मनसे के कार्यकर्ता जब भी एक-दूसरे से मिलते, ‘जय महाराष्ट्र’ कहकर अभिवादन करते और एक-दूसरे का हालचाल पूछते इसलिए ‘जय महाराष्ट्र’ का जयघोष कल पूरे मुंबई में गूंजता रहा। इतनी भारी भीड़ के बावजूद कहीं भी अफरा-तफरी या अव्यवस्था नजर नहीं आई। जो पदाधिकारी और पुलिसकर्मी तैनात थे, उनके निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था।
