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भारत ही में नहीं, दुनिया में बढ़ रही है मुस्लिम आबादी…१०० साल में १० गुना बढ़े मुसलमान!

-२०५० तक ईसाइयों से कर लेंगे बराबरी

-२०७० में दुनियाभर में मुस्लिम जनसंख्या का होगा वर्चस्व

-प्यू रिसर्च सेंटर का दावा

सामना संवाददाता / मुंबई

भारत में अक्सर इस बात की चर्चा सुनने को मिलती है कि देश में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। मगर हकीकत में न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। यदि गत १०० वर्षों में नजर डालें तो इस दौरान मुस्लिमों की आबादी १० गुना बढ़ी है। यह दावा किया है प्यू रिसर्च सेंटर ने। उसकी रिपोर्ट के अनुसार, २०५० तक मुसलमान जनसंख्या के मामले में दुनिया में ईसाइयों की बराबरी कर लेंगे।
प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष २०७० तक मुस्लिम आबादी का दुनिया मेंं वर्चस्व हो जाएगा। जानकारों की मानें तो यह परिवर्तन न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से भी दुनिया को बहुत प्रभावित करेगा।
मुसलमानों की आबादी आठ गुना बढ़ी!
हाल ही में प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि २०१० से २०२० के बीच मुस्लिम आबादी ३४.७ करोड़ के साथ बढ़कर १९४.६ करोड़ हो गई है। इसके साथ दुनिया में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी २५.६ प्रतिशत हो चुकी है। रिपोर्ट की मानें तो पिछले १०० सालों में दुनिया की आबादी लगभग चार गुना बढ़ चुकी है, जबकि मुस्लिम आबादी १० गुना बढ़ गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, आज से १०० साल पहले १९२५ में भी दुनिया में मुस्लिम थे, लेकिन इतनी बड़ी तादाद में नहीं थे, जितना कि अभी हो चुके हैं। इस वक्त मुस्लिमों की संख्या बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। १०० साल पहले दुनिया में मुस्लिमों की आबादी लगभग २० करोड़ के आसपास थी, जो कि उस वक्त की जनसंख्या का लगभग १२ फीसदी था। अब २०२५ में यह संख्या बढ़कर २०० करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है, जो लगभग २५ फीसदी है। १९२५ में दुनिया की आबादी लगभग २०० करोड़ के आसपास थी और अब २०२५ में यह ८०० करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
२०६० तक ७० फीसदी बढ़ जाएगी
१९५१ की जनगणना की मानें तो भारत में मुसलमानों की आबादी ३.५४ करोड़ थी, जो कि कुल जनसंख्या का ९.८ फीसदी था। जनगणना के अनुसार २०२० में सिर्फ भारत में मुसलमानों की आबादी बढ़कर १४.३ फीसदी हो गई है। जिस हिसाब से इस्लामिक आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से आसार जताए जा रहे हैं कि २०६० तक को इनकी संख्या ७० फीसदी बढ़ जाएगी, क्योंकि अन्य धार्मिक समूहों की तुलना में मुस्लिमों में युवाओं की संख्या ज्यादा है और इस्लाम में प्रजनन दर भी ज्यादा है। यही इनकी तेजी से जनसंख्या वृद्धि का महत्वपूर्ण कारण है।

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