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मोटरमैन को चाय-नाश्ते के भी वांदे!..५ घंटे के ब्रेक के बाद फिर शुरू हो जाती है ड्यूटी

– चर्चगेट स्टेशन का कैंटीन एक महीने से है बंद

– काम का है दबाव, १० फीसदी कम है वर्क फोर्स

ब्रिजेश पाठक / मुंबई

मुंबई की लाइफलाइन मानी जानेवाली लोकल ट्रेन के मोटरमैन रेलवे के नियम से प्रताड़ित नजर आ रहे हैं। मोटरमैन के खाने-पीने की व्यवस्था अपर्याप्त है और यही नहीं उनकी नींद भी पूरी नहीं होती है क्योंकि ब्रेक का समय ५ घंटे से भी कम का होता है। मोटरमैन के लिए अलग से बनाई गई चर्चगेट स्टेशन की वैंâटीन पिछले एक महीने से बंद पड़ी है। ऐसे में उनके चाय-नाश्ते के भी वांदे हो गए हैं। इन सब समस्याओं से जूझते हुए वह लगातार ड्यूटी दे रहे हैं।
जब इस संवाददाता ने पश्चिम रेलवे के कुछ मोटरमैन से बातचीत की तो उन्होंने अपनी तरह-तरह की समस्याएं सामने रखीं। उन्होंने बताया कि रात में चर्चगेट से बोरीवली या विरार तक ट्रेन चलाने के बाद वहां के रेस्ट हाउस में आराम करना पड़ता है। वहां डॉरमिटरी टाइप बेड होते हैं, जिनमें कुछ खास सुविधाएं नहीं होतीं। इस वजह से अच्छी नींद नहीं हो पाती है। इसके अलावा महज ५ घंटे का ब्रेक लेने के बाद फिर ड्यूटी शुरू करनी पड़ती है। दिनभर लोकल ट्रेन चलाते समय दो ट्रेनों के बीच मोटरमैन को केवल ४० मिनट का ब्रेक मिलता है। कई ट्रेनें चर्चगेट स्टेशन पर १५ से २० मिनट की देरी से पहुंचती हैं, जिससे बचे हुए २० मिनट में ही उन्हें ब्रेक लेना और नाश्ता करना होता है। इस थकाऊ टाइम टेबल के कारण मोटरमैन कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। कई मोटरमैन हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। पिछले चार महीनों में इन बीमारियों के चलते चार मोटरमैनों को डिवैâटेगराइज कर उन्हें दूसरी वैâटेगरी में शिफ्ट किया गया है।
ले रहे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
रूटीन वर्क लोड की वजह से मोटरमैन परेशान हो गए हैं। इस कारण कई मोटरमैन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने लगे हैं। वर्तमान में ७ से ८ मोटरमैनों ने प्रशासन को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिए हैं, लेकिन पहले से ही स्टाफ की कमी के चलते रेलवे प्रशासन ने उनके आवेदन लंबित रखे हैं।
रेस्ट हाउस है बंद
चर्चगेट स्टेशन पर स्थित रेस्ट हाउस पिछले करीब डेढ़ महीने से बंद पड़ा है। इससे उन्हें आराम करने की जगह नहीं मिल रही और वे लॉबी में ही बेंच पर बैठकर टिफिन खा रहे हैं। सुबह-सुबह ड्यूटी पर आनेवाले मोटरमैनों को चर्चगेट स्टेशन पर कोई वैंâटीन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें भूखे पेट ट्रेन चलानी पड़ती है। सुबह ड्यूटी पर आने वाले मोटरमैन की रिपोर्टिंग टाइम ३.५० बजे होती है।

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